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आपगा सरस्वती

मंत्र है प्रमाण इस भारत मही में कभी

 वाणी की प्रतीक देवि आपगा यशस्विनी  I

बहती थी मंद -मंद  सींचती थी छंद -छंद

बोलती थी कल , कल -कंठ से मनस्विनी  I

स्नान करते थे आर्य, पान करते थे वारि

ध्यान  धरती  थी  यह धारिणी तपस्विनी I

आज यदि होती वह , मेरे पाप धोती वह

  ज्ञान  बीज  बोती,   मेरी  मातः पयस्विनी  I

 

 

(मौलिक और अप्रकाशित )

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 22, 2014 at 8:21pm

महनीया  मीना जी \

आपका बहुत बहुत  सम्मान  i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 22, 2014 at 8:19pm

महनीया राजेश कुमारी जी

आपका शत -शत आभार i

Comment by Meena Pathak on June 22, 2014 at 5:52pm

सादर नमन 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 22, 2014 at 5:20pm

बहुत सुन्दर सरस्वती वंदना ...नमन 

कृपया ध्यान दे...

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