For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सब की हम पर ही नजर है बज्म में अब

२१२२ ११२२  २१२२

 

कुछ जलाना तो  चिरागों को जलाओं

पी के तम को ये जहाँ रोशन बनाओ

 

चल पड़ा है वो मसीहा जग बदलने

राह से कांटे सभी उसको हटाओ

 

आज चिलमन है हमारे दरमिया क्यों

नाजनीनो यूं न हमको तुम सताओ

 

सब की हम पर ही नजर है बज्म में अब

जाम नजरों से हमें छुपकर पिलाओं

 

है सबब कोई खफा जो हमसे हो तुम

बेकली दिल की बढ़ी  कुछ तो बताओ

 

बात बज्मों में निगाहें ही करेंगी

तुम भी जो कहना इशारों में बताओं

 

देख कर हमको शरम से लाल हो तुम

बंद कर ली लो जी आँखे मत लजाओ

 

जीना बचपन को जवानी में अगर हो

नाव कागज़ की ये बारिश में चलाओ

 

देखना हो जो पुराना प्यार माँ का

घर के कोने में कहीं खुद को छिपाओ

 

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 809

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 27, 2014 at 1:53pm

आदरणीय डॉ विजय जी रचना पर आपकी इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल धन्यवाद सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 27, 2014 at 1:52pm

आदरणीय गोपाल सर ..आपके शब्द मुझे रचनात्मक उर्जा से लवरेज कर रहे हैं आपका aआशीर्वाद सदैव मिलता रहे ऐसी कामना के साथ सादर प्रणाम के साथ 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 27, 2014 at 1:49pm

आदरणीया कुंती जी ..मेरे इस प्रयास पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल धन्यवाद सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 27, 2014 at 1:48pm

आदरणीय अभिनव जी ..आपका सतत प्रोत्साहन मुझे मिला है ..एक रचनाकार को जो हौसला चाहिए वो मुझे हमेशा आपसे मिला है ..ये स्नेह यथावत रहे ऐसी कामना करता हूँ ..सादर धन्यवाद के साथ 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 27, 2014 at 1:47pm

राम शिरोमणि जी ..हौसला बढाते आपके शब्दों के लिए तहे दिल शुक्रिया ..सादर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 26, 2014 at 11:40pm
जीना बचपन को जवानी में अगर हो
नाव कागज़ की ये बारिश में चलाओ
देखना हो जो पुराना प्यार माँ का
घर के कोने में कहीं खुद को छिपाओ
बहुत आकर्षक , बधाई , सादर .
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 26, 2014 at 9:09pm

मित्र

बड़ी सुन्दर  गजल है i आख़री अशआर ने तो जान ही निकाल ली i

Comment by coontee mukerji on June 26, 2014 at 7:30pm

जीना बचपन को जवानी में अगर हो

नाव कागज़ की ये बारिश में चलाओ.....बहुत सुंदर.

 

Comment by Abhinav Arun on June 26, 2014 at 4:50pm
आ. डॉ आशुतोष जी प्रभावपूर्ण शेरो की सुन्दर ग़ज़ल हुई है मुबराक्बाद !!
Comment by ram shiromani pathak on June 26, 2014 at 3:05pm

बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल आदरणीय। हार्दिक बधाई आपको। …। सादर  

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Monday
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service