For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बहुत रोया मैं,
पड़ोसी चाची के मर जाने पर
गाँव से शहर जाने पर
हाल के दंगे में
आग देखकर

डर जाने पर
खुद को लूटा के

घर जाने पर
आंसुओं ने साथ छोड़ दिया
नहीं रोया मैं,
माँ के मर जाने पर,
वो 

हर सहर के साथ

हॅसते देखना चाहती थी.
विजय प्रकाश शर्मा
मौलिक व अप्रकाशित

Views: 758

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on July 16, 2014 at 8:46am

आ० आशुतोष जी,
आपकी सराहना पाकर मैं कृतज्ञ हूँ.

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 15, 2014 at 4:04pm

आदरणीय शर्मा जी ..आपकी यह रचना तो सीधे दिल में उतर गयी ..ताजगी से लवरेज इस रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर                                  

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on July 13, 2014 at 8:02pm

आ० गुमनाम पिठौरागढ़ी जी ,
आपने रचना को मान दिया ,उत्साह वर्धन के लिए बहुत धन्यवाद.सादर.

Comment by gumnaam pithoragarhi on July 13, 2014 at 1:24pm

waah waah khoob ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on July 13, 2014 at 10:01am

आ० जितेन्द्र 'गीत' जी ,

उत्साह वर्धन के लिए बहुत धन्यवाद.सादर.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 13, 2014 at 9:49am

मर्मस्पर्शी रचना आदरणीय विजय जी, बधाई स्वीकारें

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on July 12, 2014 at 10:53am

आ० गोपाल जी, आपके आशीर्वचन पर पुनः नमन.

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 12, 2014 at 10:49am

शर्मा जी

अद्भुत संवेदना i इससे अधिक क्या  कहूं ?

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on July 12, 2014 at 12:00am

आ० राजेश कुमारी जी,
प्रस्तुत रचना पर आपके उदगार ने रचना के साथ रचनाकार का भी मान बढ़ाया,कोटिश:आभार.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 11, 2014 at 8:00pm

दिल छू गई रचना ....

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
19 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
yesterday
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय  अखिलेश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सहमत एवं संशोधित "
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय सुशीलजी हार्दिक बधाई। लगातार बढ़िया दोहा सप्तक लिख रहें हैं। घूस खोरी ....... यह …"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Mar 5
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Mar 4
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Mar 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service