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छै दोहे – गिरिराज भंडारी

********************

भाव शिल्प में आ सके , बस उतना ही बोल

मन का दरवाज़ा अभी , मत  पूरा तू  खोल

यदि कोशिश निर्बाध हो, सध जाता है   छंद

घबरा मत , शर्मा नहीं, गलती  से मति मंद

गेय बनाना है अगर , छंद , कलों  को  जान

और रचेगा छंद जब , कल  का रखना मान

शिल्प ज्ञान को पूर्ण कर , याद रहे गुरु पाठ

इंसा होके काम तू  , मत करना ज्यों  काठ

चाहे बातें  हों  कठिन , रखना  भाषा  आम

समझें  ना पाठक अगर , सब कुछ है  बेकाम

जब भी कहना बात कुछ , तार्किकता हो खूब

लेकिन बातें  कह वही , तू  जिससे   मंसूब

मौलिक एवँ अप्रकाशित ( संशोधित )

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 7, 2014 at 5:28pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी , आपका हार्दिक आभार |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 7, 2014 at 5:27pm

आ. सौरभ भाई , आपका बहुत बहुत शुक्रिया , सराहना के लिए और सलाह के लिए , अभी संशोधित कर रहा हूँ |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 7, 2014 at 5:25pm

आ. राम शिरोमणि भाई , आपका बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 7, 2014 at 5:25pm

आदरणीय बड़े भाई ,गोपाल जी आपका आभार , गलतियाँ बताने के लिए , अभी संशोधन कर  रहा हूँ |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 7, 2014 at 5:23pm

आदरणीया वन्दना जी , आपका बहुत आभार

Comment by annapurna bajpai on September 7, 2014 at 5:22pm

सुंदर दोहे , आ0 गिरिराज जी ,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 7, 2014 at 3:14pm

आदरणीय गिरिराजभाईजी, आपने तो छन्द शास्त्र के मूलभूत विधान को ही शब्दबद्ध कर दिया है !  बहुत खूब आदरणीय !

वैसे दोहा छन्द के शिल्पगत दोषों से आप बच सकते थे. आदरणीय गोपाल नारायनजी ने सारी बातें कह दी हैं. मैं भी आदरणीय के कहे से सहमत हूँ.

सादर

Comment by ram shiromani pathak on September 7, 2014 at 12:59pm
आदरणीय गिरिराज जी दोहों के माध्यम से बहुत सटीक जानकारी......सादर
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 7, 2014 at 12:31pm

मित्र

गेय बनाना है यदि --एक मात्र कम है -- गेय बनाना है अगर

न समझे पाठक यदि - द० मात्र कम है - ना समझे पाठक अगर

 ऐसा होता है कभी i पर आपके दोहे बहुत सुन्दर और भावपूर्ण है i  सादर i

Comment by vandana on September 7, 2014 at 7:32am

बहुत सुन्दर सीख सहित दोहे आदरणीय 

कृपया ध्यान दे...

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