For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अरे चाचा !

तुम तो बिलकुल ही बदल गये

मैंने कहा – ‘ तुम्हे याद है बिरजू 

यहाँ मेरे घर के सामने

बड़ा सा मैदान था 

और बीच में एक कुआं 

जहाँ गाँव के लोग

पानी भरने आते थे 

सामने जल से भरा ताल 

और माता भवानी का चबूतरा

चबूतरे के बीच में विशाल बरगद

ताल की बगल में पगडंडी

पगडंडी के दूसरी ओर

घर की लम्बी चार दीवारी

आगे नान्हक चाचा का आफर

उसके एक सिरे पर

खजूर के दो पेड़ 

पेड़ो के पास से गुजरता

धूल भरा गलियारा

गलियारे के किनारे

पिलुआ के हरियाले पेड़ 

दूसरी ओर राधे दादा के खेत 

पिलुआ पर बैठे दो-चार बच्चे

कूदते-फुदकते

एक डाल से दूसरी डाल पर

शोर मचाते लड़ते

ऊसर में ख़त्म होता वह

सर्पाकार गलियारा

उस ठौर जलती थी

गाँव की होली

झांकता था दूर से

लसोढ़े का पेड़  

बरसते मेह में

सुलगती थी उसकी गंध 

आज ये सब कहाँ है ?

पेड़ो को लील लिया

समय की मार ने

गलियारों को अतिक्रमण ने

मैदानों को बढ़ती बस्ती ने  

सभी कुछ तो बदल गया 

तुम भी वही है 

मै भी वही हूँ

गाँव भी वही है

पर न तुम, न मैं

और न गाँव 

कोई भी पहले जैसे नहीं हैं

सब कुछ बदलता है

सब कुछ बदला है

मिट भी जायेगा

एक दिन !

 

(मौलिक व अप्रकाशित )

Views: 722

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 25, 2014 at 9:40pm

जीतू भाई

आपका सादर आभार i

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 25, 2014 at 2:00pm

सच! वास्तविकता को दिखाती हुई एक सुंदर रचना प्रस्तुति, बधाई आपको आदरणीय डा. गोपाल जी

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 25, 2014 at 11:29am

पवन कुमार जी

आपका आभार  i सस्नेह i

Comment by Pawan Kumar on September 24, 2014 at 7:09pm
बहुत ही सुन्दर .... मौलिकता के दर्शन से सराबोर .......... अफसोस कि आधुनिकता में सबकुछ बदलता जा रहा है।
आदरणीय .... सादर बधाई !!
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 23, 2014 at 12:44pm

आदरणीय  खुर्शीद खैरादी जी

आपके प्रोत्साहन से पुलकित हुआ i सादर आभार i

 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 23, 2014 at 12:43pm

आदरणीय हरिवल्लभ जी

आपका आभार व्यक्त करता हूँ i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 23, 2014 at 12:42pm

विजय सर !

आपकी विशद टिप्पणी से संतुष्टि मिली i आपका आभार i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 23, 2014 at 12:40pm

आदरणीया छाया शुक्ल जी

आपका शत-शत आभार i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 23, 2014 at 12:39pm
आदरणीय शर्मा जी
आपका आभार एवं अभिनन्दन i
Comment by khursheed khairadi on September 23, 2014 at 10:20am

ऊसर में ख़त्म होता वह

सर्पाकार गलियारा

उस ठौर जलती थी

गाँव की होली

झांकता था दूर से

लसोढ़े का पेड़  

बरसते मेह में

सुलगती थी उसकी गंध 

आदरणीय गोपालनारायण जी ,हार्दिक अभिनन्दन ,बहुत ही मार्मिक चित्रण है |आपके शब्दचित्र से लगभग मिलता हुआ मेरे गाँव का मंज़र है|वही लसोड़े का पेड़ और पके लसोड़ों से लक दक  डालियाँ ,ऐसा लगता था जैसे  भारी  कुंदन जड़ित ज़री की हरी ओढ़नी हो |आपके लेखनी को कोटि प्रणाम |सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service