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ना रहे जो वक्त तो भी रहेगा वक्त ही

वक्त बेज़ुबां है तो भी कहेगा वक्त ही |

 

यूं तो गुज़र जाता है जिंदगी की तरह

जिंदगी के बाद तो भी रहेगा वक्त ही |

 

मैं उसे थामे चलूँ कितनी भी दूर ही

हाथ मेरा थाम तो भी चलेगा वक्त ही |

 

मेरी हर शै बढे या घटे है हर पल

जितना भी घटे तो भी बढेगा वक्त ही |

 

जो फैला है मार-काट साथ जिंदगी के

मारो किसी को तो भी कटेगा वक्त ही |

 

 (मौलिक और अप्रकाशित)

 

 

 

 

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Comment by kanta roy on October 8, 2015 at 1:24pm

मैं उसे थामे चलूँ कितनी भी दूर ही
हाथ मेरा थाम तो भी चलेगा वक्त ही ----- वक़्त की क्या खूब चित्रण हुआ है आपकी इस रचना में आदरणीय चंद्रेश जी। बिलकुल सही कहा है आपने कहीं कुछ बचे न बचे रहेगा यहां सिर्फ वक़्त ही। क्षणभंगुर जीवन के बहुत खूब कमजोर पक्ष उजागर किये हैं आपने अपने इस रचना माध्यम से। बधाई आपको।

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on October 4, 2014 at 3:17pm

आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण जी, आपका ह्रदय से धन्यवाद| सही याद किया आपने| वक्त के ही दिन-रात-कल-आज हैं ये सभी वक्त से ही तो बने हैं|

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on October 4, 2014 at 3:15pm

आपका हार्दिक आभार, महिमा श्री जी !!

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on October 4, 2014 at 3:14pm

आदरणीय Dr. Vijai Shankar जी, आपका हार्दिक आभार !! सुन्दर विश्लेषण किया आपने, ज़िन्दगी एक संयोग है जिसमें वक्त की भी भूमिका है| सही है.. जीवन में वक्त की भूमिका है और वक्त में जीवन की| पुनः धन्यवाद !

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on October 4, 2014 at 3:12pm

आदरणीय जितेन्द्र जी, आपका हार्दिक आभार !!

Comment by MAHIMA SHREE on September 30, 2014 at 8:06am

ना रहे जो वक्त तो भी रहेगा वक्त ही

वक्त बेज़ुबां है तो भी कहेगा वक्त ही |

 

यूं तो गुज़र जाता है जिंदगी की तरह

जिंदगी के बाद तो भी रहेगा वक्त ही |.....वाह ...बेहद उम्दा ..वक्त को बहुत ही खूबसूरती से पेश किया है ..हार्दिक बधाई स्वीकार करे 

 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 26, 2014 at 2:49pm

वक्त फिल्म का गाना यादा गया - वक्त के दिन और रात i वक्त के कल और आज i --- सुन्दर रचना i

Comment by Dr. Vijai Shanker on September 26, 2014 at 2:02pm

वक़्त के बारे में यह सवाल बहुत उठता है , पर जिंदगी है क्या , एक संयोग जिसमें वक़्त की भी भूमिका है , शायद सबसे बड़ी भूमिका है , वक़्त है
तो है। नहीं तो,नहीं है।
ना रहे जो वक्त तो भी रहेगा वक्त ही
वक्त बेज़ुबां है तो भी कहेगा वक्त ही |

बधाई आदरणीय चंद्रेश कुमार छटलानी जी।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 26, 2014 at 11:29am

यूं तो गुज़र जाता है जिंदगी की तरह

जिंदगी के बाद तो भी रहेगा वक्त ही......बहुत गहरी बात कही. बधाई आदरणीय चंद्रेश जी

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