For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

धनवान बनाम विद्वान् (चार दोहे)

धन प्रभुता ना मिले विद्वान् जो ना हो साथ |

कर्म यज्ञ में दे आहुति विद्वान् ही का हाथ ||

 

विद्वता का उपयोग कर धनवान धन कमाए|

विद्वान् इस राह चले तो धनी निर्धन बन जाए||

 

धनवान को वाहन मिले संग्रह करके धन |

विद्वान वाहन में घूमे निग्रह करके मन ||

 

धन की करे चौकीदारी हर रात धनवान |

ज्ञान का सृजन करे हर रात विद्वान् ||

 

(मौलिक और अप्रकाशित)

Views: 489

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 15, 2014 at 7:07pm

चंद्रेश जी

आपके दोहों को पढ़कर लगा कि आप में भाव तो है पर दोहों का कठिन शिल्प आप बिलकुल नहीं जानते i मै  आपको टिप्स देता हूँ  i दोहे में चार चरण है आप जानते है i पहले व् तीसरे चरण में मात्रा   का क्रम दो प्रकार से रख सकते है 4+4+3+2 या 3+3+2+3+2 बचे हुए चरणों का क्रम होगा  4+4+3 या 3+3+2+3  i आप प्रयास करे मजा आएगा i  सस्नेह i

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on September 15, 2014 at 3:39pm

आदरणीय सौरभजी, लक्ष्मण जी|

तहे दिल से धन्यवाद कि आपने इतनी गहराई इसे पढ़ा| आपके विचार एवं उत्तम सलाह भी सर-आँखों पर| आदेशानुसार आलेख पढ़ कर आवश्यक संशोधन करने के पश्चात हाज़िर होता हूँ|

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 15, 2014 at 2:31pm

भाई श्री चन्द्र शेखर जी, आदरणीय सौरभ जी की सलाह अनुसार दोहा छंद के विधान को समझे | मूल रूप से 13-11 मात्राओं 

के चार चरणों (दो पंक्तियों) में दोहा प्रथम और तृतीय चरण 13 मात्राओं का विषम और दूसरी व चौथी पंक्ति 11 मात्राओ की

सम चरण की होती है | विषम चरण का अंत लघु गुरु से और सम चरण का अंत गुरु लघु से किया जाता है | इसी परिप्रेक्ष में

आप अपने दोहे को स्वयं जांच ले | प्रस्तुति के लिए धन्यवाद  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 15, 2014 at 2:11pm

आपकी प्रस्तुति के लिए धन्यवाद.

किन्तु एक अनुरोध है चन्द्रशेखर भाई, कि अपने उत्साह को सदिश करें. इस मंच पर दोहा छन्द तथा उसके विधान को लेकर कई आलेख उपलब्ध हैं. उनका अध्ययन करें.

Comment by Shyam Narain Verma on September 15, 2014 at 1:16pm
बहुत सुंदर दोहें ,  हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय.......................

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
20 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
23 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
23 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service