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'दीप जलाएँ....

मावस का तम घना मिटाएँ
आओ सब मिल
दीप जलाएँ।

महकाएँ घर आँगन द्वारे
स्वच्छ करें गलियाँ चौबारे
कटुता के सब महल ढहाएँ
हिलमिलकर यह
पर्व मनाएँ।

अम्बर का तम मिट ना पाया
अनगिन तारे थाल सजाया
तम की शिला भेद जो पाएँ
दीप माल से
धरा सजाएँ।

घर जो उजियारे को तरसे
माँ लक्ष्मी की कृपा यूँ बरसे
दीप पर्व वो सभी मनाएँ
खील बतासे
ना मुरझाएँ।
आओ मिल सब
दीप जलाएँ।
सीमा हरि शर्मा 07.10.2014
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by seemahari sharma on October 8, 2014 at 4:42pm
Shyam Narain Verma जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका।
Comment by seemahari sharma on October 8, 2014 at 4:41pm
rajesh kumari जी आपको भी दीपावली की अग्रिम बधाई। रचना पसंद करने के लिये ह्रदय से आभार। इसी तरह स्नेह बनाए रखें सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 8, 2014 at 12:11pm

दीपावली की अग्रिम बधाई ...बहुत सुन्दर रचना है बहुत- बहुत बधाई सीमा जी 

Comment by Shyam Narain Verma on October 8, 2014 at 10:31am

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ... सादर बधाई................

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 7, 2014 at 11:42pm

सच! बहुत ही सुंदर. इस आशा से भरी रचना पर आपको हार्दिक बधाई आदरणीया सीमा जी

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 7, 2014 at 9:43pm
दीपावली के शुभ आगमन पर बहुत सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय सीमा हरि जी, बधाई .

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