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प्रथम प्यार की आस में

मैने किया प्रयास
सजनी एट्टीट्यूड में
तनिक न डाले घास

पोथी पढ़कर प्यार की
तनिक न असर बुझाय
जब-जब भी कोशिश किया
चप्पल-जूताखाय


हर महफिल हर रंग में
चेहरा जिसका भाय
उसने राखी बाँध के
भाई लिया बनाय


घरवालों की मान के
डाल दिया जयमाल
दो दो मेरे सालियाँ
पकड़ के खीचें गाल

मारा-मारा फिर रहा
जबसे हुआ विवाह
बीबी ऐसी मिल गई
रहती बेपरवाह

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by Pawan Kumar on November 6, 2014 at 2:30pm

आदरणीय राहुल जी सादर अभिवादन, प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार!

Comment by Rahul Dangi Panchal on November 4, 2014 at 11:58am
बहुत खूब
Comment by Pawan Kumar on October 16, 2014 at 4:00pm

आदरणीय लक्ष्मण रामानुज जी सादर अभिवादन, दोहे का पूर्ण ज्ञान न होने के कारण इसे मैने तुकांत कहना ही ठीक समझा, फिर भी आपने त्रुटियों को सुधार कर दोहे का पूर्ण रुप दे दिया जो उत्साहित करता है कि दोहे पर भी प्रयास कर सकता हूँ। दोहे में जितनी भी चूक हुई है, आपके बताए अनुसार सही कर ले रहा हूँ।
रचना पर अपना मुल्यवान समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद,
यूँ ही सस्नेह मार्गदर्शन करते रहिएगा, हृदय से आभार!

Comment by Pawan Kumar on October 16, 2014 at 3:52pm

आदरणीय आलोक जी सादर अभिवादन, प्रशंसा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद।

Comment by Pawan Kumar on October 16, 2014 at 3:50pm

आदरणीय जितेन्द्र भईया सादर अभिवादन, सस्नेह शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद, हृदय से आभार।

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 15, 2014 at 10:57am

अच्छा हास्य हुआ है श्री पवन कुमार जी, तुकांत तो ठीक है पर लगता है आपने दोहे रचने का प्रयास किया है |अगर ये 

दोहे है तो मात्रा भार की गणना में चूक हुई लगती है, कृपया देख ले -

पहले प्यार की आस में -  14 मात्राए है | इसे - "प्रथम प्यार की आस में"  कर सकते है 

मैने किया प्रयास
सजनी एट्टीट्यूड में
तनिक न डाले घास

प्यार की पोथी पढ़ लिया- 14 मात्राए है - इस " पोथी पढ़कर प्यार की" कर सकते है 
तनिक न असर बुझाय
जब-जब भी कोशिश किया
चप्पल-जुता खाय----------- जूता करले 


हर महफिल हर रंग में
चेहरा जिसका भाय
उसने राखी बाँध के
भाई लिया बनाय


घरवालों की मान के
डाल दिया जयमाल
बन गई दो-दो सालियाँ  -  14 मात्राएँ हो रही है | इसे " दो दो मेरे सालियाँ" कर सकते है 
पकड़ के खीचें गाल

मारा-मारा फिर रहा
जबसे हुआ विवाह
बीबी ऐसी मिल गई
रहती है बेपरवाह------- इससमे 13 मात्राएँ है | सम चरों में 11 मात्राए हो | इस "रहती बेपरवाह"करना उचित होगा 

सुंदर अभिव्यक्ति के लिए बधाई 

Comment by Alok Mittal on October 14, 2014 at 1:37pm

बहुत ख़ूब ....

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 13, 2014 at 11:27pm

बहुत ही हास्यप्रद रचना. बधाई पवन भाई

कृपया ध्यान दे...

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