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क्षणिकाएँ

1.
थम गई
गर्जन मेघों की
दामिनी भी
शरमा गयी
सावन की पहली बूँद
उनकी ज़ुल्फ़ों से टकरा गयी
............................................
2.
साया जवानी का
अंजाम देख
घबरा गया
वर्तमान की
टूटी लाठी से
भूतकाल टकरा गया
..............................................
3.
किसकी जुदाई का दंश
पाषाण को रुला गया
लहरों पे झील की
आसमाँ का चाँद
बस तन्हा 
रह गया
..............................................
4.
वेगवती समीर
वातायन के पट खामोश
नयन देहरी द्वारे
गठरी बन बैठी
परदेशी पी की याद
............................................
5.
हर रंग में
खुदा संग होता है
रंग देख के इंसान के
खुदा भी दंग होता है
छोडो मज़हब के झगड़े
मज़हब में तो बस
मुहब्बत का रंग होता है

.

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 668

Comment

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Comment by Sushil Sarna on October 30, 2014 at 11:37am

आदरणीय     Alok Mittal जी क्षणिकाओं पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया ने मेरे प्रयास को सार्थक कर दिया , आपका हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on October 30, 2014 at 11:37am

आदरणीय     vijay nikore जी क्षणिकाओं पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया ने मेरे प्रयास को सार्थक कर दिया , आपका हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on October 30, 2014 at 11:36am

आदरणीय     rajesh kumari जी क्षणिकाओं पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया ने मेरे प्रयास को सार्थक कर दिया , आपका हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on October 30, 2014 at 11:35am

आदरणीय     लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी क्षणिकाओं पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया ने मेरे प्रयास को सार्थक कर दिया , आपका हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on October 30, 2014 at 11:34am

आदरणीय    narendrasinh chauhan जी क्षणिकाओं पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया ने मेरे प्रयास को सार्थक कर दिया , आपका हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on October 30, 2014 at 11:34am

आदरणीय   somesh kumar  जी क्षणिकाओं पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया ने मेरे प्रयास को सार्थक कर दिया , आपका हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on October 30, 2014 at 11:33am

आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव  जी क्षणिकाओं पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया ने मेरे प्रयास को सार्थक कर दिया , आपका हार्दिक आभार। 

Comment by Alok Mittal on October 29, 2014 at 6:06pm

वाह बहुत सुंदर भाई जी ....सुंदर बहुत सुंदर क्षणिकाएँ हैं। बधाई।

Comment by vijay nikore on October 29, 2014 at 3:42pm

बहुत सुन्दर क्षणिकाएँ हैं। बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 29, 2014 at 11:52am

सुन्दर क्षणिकाएँ ...हार्दिक बधाई 

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