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"पापा, पढ़ने के बाद मुझे जाॅब तो मिल जाएगी ना?"
"किस मूर्ख ने कहा है तुमको नौकरी करनी है! तुमको तो राज करना है राज, मेरे राजकुमार बेटे।"- नेता जी ने अपने 12 साल के लड़के को सीने से लगा लिया।

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by विनोद खनगवाल on November 26, 2014 at 2:28pm
आदरणीय लक्ष्मण रामानुज जी रचना पर बारिकी से नजर डालने के लिए आभार।
Comment by विनोद खनगवाल on November 26, 2014 at 2:26pm
आदरणीय डॉ साहब जी आपका धन्यवाद।
Comment by विनोद खनगवाल on November 26, 2014 at 2:24pm
आदरणीय सोमेश जी बहुत बहुत धन्यवाद।
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 25, 2014 at 11:53am

इस लघु कथा में कई पहलू सामने  आये है | पहले तो बेटा जाँब मिल जाने की उम्मीद में पढ़ाई कर रहा है | युवकों में यह मानसिकता अभी भी कायम है | दूसरी बात, नेताओं में  अभी सामंत शाही को सोच बरकरार है | दो पंक्तियों के लाजवाब लघु कथा हुई है | मेरी दिली बधाई स्वीकारे  श्री  विनोद खनगवाल जी 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 24, 2014 at 11:06am

अच्छी लघु  कथा है i व्यंगार्थ अन्तर्हित है i

Comment by somesh kumar on November 24, 2014 at 9:12am

नई सत्ता ,नए प्रकार के राजा और वही पुरानी परम्परा ,प्रजातंत्र का मखौल उड़ाती हुई |पहले जन-धन को लूटेगा फिर उसकी संताने उसी क्रम को जारी रखेगी |लुट-तन्त्र की सुंदर लघुकथा 

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