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अतुकान्त कविता : पगली (गणेश जी बागी)

अतुकान्त कविता : पगली

विवाहिता या परित्यक्तता
अबला या सबला
नही पता .......
पता है तो बस इतना कि
वो एक नारी है ।


साथ में लिए थे फेरे
फेरों के साथ
वचन निभाने के वादे

किन्तु .......
उन्हे निभाना है राष्ट्र धर्म
और इसे ……
नारी धर्म
पगली !!


उनकी सफलता के लिए
व्रत, उपवास, मनौती
मंदिरों के चौखटों पर
पटकती माथा
और खुश हो गयी
महज सुनकर कि
एक सरकारी कागज में
पत्नी की जगह
उन्होने उसका नाम लिख दिया
मज़बूरी मे ही सही
पहले तो छोड़ देते थे खाली
पगली !!


काल चक्र घुमा
मन्नतें पूर्ण हुईं
बड़ी उम्मीद से सूर्य की ओर तकती
कोई किरण लेकर आएगी बुलावा
इंद्रासन पर बैठते हुए देखना चाहती थी
पगली !!


कोई शिकायत नही
संस्कारी नारी
स्कूल मे पढ़ाती रही
ढाई आखर प्रेम के
किंतु
खुद न पढ़ सकी
सुबह से रात
रात से सुबह
फिर आस जग उठी
आएगा इंद्रलोक से बुलावा
रहने जाएगी महल में
पगली !!


हाय री नारी
यह दिन भी देखना पड़ा
पूछना पड़ा
क्या है अधिकार
उसे आज भी लगता है
वह है अर्धांगिनी
पगली !!

(मौलिक व अप्रकाशित)
पिछला पोस्ट => लघुकथा : दौर

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Comment

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Comment by asha pandey ojha on January 14, 2015 at 4:09pm

बहुत  बढ़िया मार्मिक कविता गणेश भईया 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 12, 2015 at 4:19pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय धर्मेन्द्र जी.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 12, 2015 at 4:18pm

आदरणीय विजय प्रकाश शर्मा जी, कविता पर आपकी उपस्थिति उत्साहवर्धक है, बहुत बहुत आभार.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 12, 2015 at 4:16pm

सराहना और उत्साहवर्धन हेतु हृदय से आभार आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 12, 2015 at 4:14pm

सराहना और उत्साहवर्धन हेतु हृदय से आभार आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 12, 2015 at 4:13pm

सराहना हेतु आभार प्रिय राम भाई.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 12, 2015 at 4:13pm

आदरणीय गिरिराज भाई साहब, आपकी सराहना उत्साहवर्धक है, बहुत बहुत आभार.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 12, 2015 at 4:10pm

आदरणीय गुरुदेव श्री योगराज प्रभाकर जी, आपका आशीर्वाद इस रचना को प्राप्त हुई, लेखन कर्म सार्थक हुआ, बहुत बहुत आभार.

Comment by Ram Ashery on December 25, 2014 at 4:31pm

you have done wonderful job we pray to the god help her to fulfill her wish.

Comment by vandana on December 25, 2014 at 4:53am

और खुश हो गयी 
महज सुनकर कि 
एक सरकारी कागज में 
पत्नी की जगह
उन्होने उसका नाम लिख दिया
मज़बूरी मे ही सही 
पहले तो छोड़ देते थे खाली 
पगली !!

.....

हाय री नारी 
यह दिन भी देखना पड़ा 
पूछना पड़ा
क्या है अधिकार 
उसे आज भी लगता है 
वह है अर्धांगिनी 
पगली !!

बहुत ही मार्मिक और सच्ची रचना आदरणीय 

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