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Ram Ashery
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  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"
 

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Ram Ashery commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post एक ग़ज़ल -कठुआ की आसिफ़ा में नाम
"अदरणीय नीलेश जी आपको इस हृदय स्पर्शी रचना के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकार हो । हमारा समाज सो रहा है उन्हें जगाने के लिए अपने स्तर पर सभी को प्रयास करना होगा वरना आज असफ़ा कल कोई और इन दरिंदों का शिकार होता रहेगा । जब हमारी न्याय व्यवस्था जाति धरम और…"
Apr 15
Ram Ashery commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकान्त कविता : अजन्मी कविता
"it is representing a real life of an engineer congratulation "
Apr 13
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Ram Ashery's blog post रोटी की मजदूर
"आद0 रामश्रये जी बात कथन या कथ्य की नहीं, बात मैंने शिल्प की है। आप दुबारा प्रतिक्रिया पढ़ें। सादर"
Mar 28
Ram Ashery commented on Ram Ashery's blog post रोटी की मजदूर
"श्री मान जी शायद मैं अपनी बात कहने में कुछ गलती कर गया हूँ लेकिन मैं यह कहना चाहता हूँ की आज मजदूर की जो दुर्दशा है वह घर काम के लिए शहर जाता है खाली हाथ घर लौट कर आता है पर उसे बच्चे की फीस और राशन की व्यवस्था तो करनी ही है विभिन्न योजनाओं के…"
Mar 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Ram Ashery's blog post रोटी की मजदूर
"आद0 रामश्रये जी सादर अभिवादन। रचना में जब तुकांतता ली जाती है तो उसका भी एक विधान होता है, औऱ अगर कविता अतुकांत न हो तो एक निश्चित विधान भी। पर क्षमा चाहूँगा उपरोक्त रचना में मुझे कोई निश्चित विधान भी नहीं मिला और तुकांतता भी उतनी सटीक नहीं। यह…"
Mar 26
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Ram Ashery's blog post गर बनाना चाहते हो विकसित
"आद0 रामाश्रय जी सादर अभिवादन। बढिया रचना का प्रयास पर कुछ विराम और वर्तनीगत अशुद्धियों से रचना थोड़ी कमतर हो रही है। मात्राविधान भी मैं समझ नहीं पाया। इस प्रस्तुति पर बधाई आपको"
Mar 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ram Ashery's blog post गर बनाना चाहते हो विकसित
"आ.भाई राम आसरे जी, सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 26
Ram Ashery commented on Ram Ashery's blog post रोटी की मजदूर
"श्री मान जरूर आपकी बातों को ध्यान में रखूगा और सुधारने की कोशिस करूंगा । आपके सुझाव के लिए आपको हृदय से धन्यवाद"
Mar 25
Ram Ashery commented on Ram Ashery's blog post गर बनाना चाहते हो विकसित
"आपके मार्ग दर्शन के लिए सहृदय धन्यवाद स्वीकार हो मैं अपनी ओर से त्रुटियों को सुधारने की पूरी कोशिस करूंगा"
Mar 25
Ram Ashery commented on Ram Ashery's blog post गर बनाना चाहते हो विकसित
"आपके मार्ग दर्शन के लिए सहृदय धन्यवाद स्वीकार हो मैं अपनी ओर से त्रुटियों को सुधारने की पूरी कोशिस करूंगा"
Mar 25
somesh kumar commented on Ram Ashery's blog post रोटी की मजदूर
"मंच पर आपकी पहली रचना पढ़ रहा हूँ | बेहतरीन प्रयास हैं ,अभ्यास जारी रखें| तुकांत और भावपूर्ण रचना है पर लगता है आप मेरी तरह ही मुक्त एवं तुकांत के बीच फँसे है |उम्मीद है मंच के मनीषियों से उचित मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे और बेहतर प्रस्तुति देंगे |"
Mar 25
Ram Ashery posted a blog post

रोटी की मजदूर

यहाँ रोटी के चक्कर में फिरतागाँव से शहर काम नहीं मिलतारात को थका हुआ घर लौटतामजदूर दुखी मन से यह कहता ।अब घर का राशन बच्चे की फीसबड़ी मुश्किल से कटेगें दिन तीस ।विकास की गति है पंद्रह से बीसचली है दिल्ली से ले शुभ अशीष ।सड़क पर बना पुल जब गया टूटकिस्मत की गाड़ी को लिया लूटप्रतिपक्ष कहते रहे सभी एक जुटविपक्षी एकता में डाल दी फूट ।संसद से सड़क तक झूठ ही झूठजंगल में बचे सिर्फ ठूठ ही ठूठमानवता गई इस जहां से रूठमरती है जनता पर मंत्री झूठ ॥मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Mar 25
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ram Ashery's blog post गर बनाना चाहते हो विकसित
"अच्छी रचना है आदरणीय..बधाई"
Mar 25
Mohammed Arif commented on Ram Ashery's blog post गर बनाना चाहते हो विकसित
"आदरणीय राम आश्रेय जी आदाब,                            आशा, विश्वास और उम्मीद का अलख जगाती बेहतरीन कविता । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 25
Ram Ashery posted a blog post

गर बनाना चाहते हो विकसित

गर बनाना चाहते हो विकसित वतन तो करनी होगी मेहनत । धरम जाति की दूर करो नफरत सब आज मिलकर संवार लो किस्मत । मजदूर गरीब की किस्मत खोटी प्रजातन्त्र में भी मिलती न रोटी । मरता किसान फसल हुई खोटी घर में न अन्न कैसे बने रोटी । कर्ज में कृषक सरकार है सोती ललित विदेश में चुन रहा मोती । अज्ञान है मिटाना करो सुनिश्चित हर बालक हो आज करो सुशिक्षित । बज गया बिगुल जंग होना बाकी खत्म हुइ रात सुबह होना बाकी । समता समाज में आना बाकी गरीब के घर प्रकाश है बाकी । हम सबकी कोशिसे रंग लाएगी अज्ञान गंदगी साफ हो जाएगी ।…See More
Mar 24
Samar kabeer commented on Ram Ashery's blog post सुख
"जनाब राम आश्रय जी आदाब,ये रचना किस विधा में है, रचना के साथ लिख दिया करें ताकि कुछ कहने में आसानी हो ।"
Jan 14

Profile Information

Gender
Male
City State
surat
Native Place
Allahabad
Profession
service
About me
i am working in the institution as a teacher

क्यारी देखी फूल बिन ,माली हुआ उदास ।

कह दी मन की बात सब, जा पेड़ों के पास ॥

हिन्दी को समृद्धि करन हित, मन में जागी आस ।

गाँव गली हर शहर तक ,करना अथक प्रयास ॥

कदम बढ़ाओ सड़क पर ,मन में रख कर विश्वाश ।

मिली सफलता एक दिन ,सबकी पूरी आश ॥

सूरज चमके अम्बर में , करे तिमिर का नाश ।

अज्ञानता का भय मिटे, फैले जगत प्रकाश ॥

चंदा दमकी आसमान  ,गई जगत में छाय ।

हिन्दी पहुंची जन जन में, तब बाधा मिट जाय ॥

हिन्दी हमारी ताज अब, सबको रख कर पास ।

फूटा भांडा ढोंग का ,हुआ तिमिर का नाश ॥

घनी अंधेरी राह में जब राह न दिखती होय ।

हिन्दी साथ में तब चली, राह सुगम तब होय ॥

जब हिन्दी में बात करें, तो गर्व का अनुभव होय ।

गाँव शहर परदेश में , माथा नीच न होय ॥

पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण, चहुं दिश हिन्दी आज ।

जाति धर्म के बंधन मिटे, आयी समता आज ॥  

दूध और पानी की तरह ,मिल गए सभी समाज  ॥

पर्वत सोहे न भाल बिन, नदी बहे बिन नीर ।

देश न सोहे हिन्दी बिन , जीवन रहित शरीर ॥

ध्वज फहराए विश्व में, नभ तक जाए छाय ।

ममता जागे हृदय में , हिन्दी सभी अपनाय ॥

 मौलिक एवं प्रकाशित 

 

      

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रोटी की मजदूर

यहाँ रोटी के चक्कर में फिरता

गाँव से शहर काम नहीं मिलता

रात को थका हुआ घर लौटता

मजदूर दुखी मन से यह कहता ।

अब घर का राशन बच्चे की फीस

बड़ी मुश्किल से कटेगें दिन तीस ।

विकास की गति है पंद्रह से बीस

चली है दिल्ली से ले शुभ अशीष ।

सड़क पर बना पुल जब गया टूट

किस्मत की गाड़ी को लिया लूट

प्रतिपक्ष कहते रहे सभी एक जुट

विपक्षी एकता में डाल दी फूट ।

संसद से सड़क तक झूठ ही झूठ

जंगल में बचे सिर्फ ठूठ ही ठूठ

मानवता गई इस जहां से… Continue

Posted on March 24, 2018 at 4:42pm — 5 Comments

गर बनाना चाहते हो विकसित

गर बनाना चाहते हो विकसित

वतन तो करनी होगी मेहनत ।

धरम जाति की दूर करो नफरत

सब आज मिलकर संवार लो किस्मत ।

मजदूर गरीब की किस्मत खोटी

प्रजातन्त्र में भी मिलती न रोटी ।

मरता किसान फसल हुई खोटी

घर में न अन्न कैसे बने रोटी ।

कर्ज में कृषक सरकार है सोती

ललित विदेश में चुन रहा मोती ।

अज्ञान है मिटाना करो सुनिश्चित

हर बालक हो आज करो सुशिक्षित ।

बज गया बिगुल जंग होना बाकी

खत्म हुइ रात सुबह होना बाकी ।

समता समाज में आना बाकी…

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Posted on March 23, 2018 at 4:00pm — 6 Comments

सुख

सुख

सुख! सुख! लोगों के जीवन में सुख है कहाँ

जन्म से लेकर मृत्यु तक सभी दुखी हैं यहाँ

सुख हमारे जिंदगी में मृग तृष्णा जैसी है यहाँ

सदा हमसे दूर ही देखने में नजर आती यहाँ

अपने नेताओं को दौलत की खुशबू आती जहां

सभी अपने ईमान को बेचकर टूट पड़ते वहाँ

सभी लोग सुख खरीदने की कोशिस करते जहाँ

माँ बाप भाई बहन पैसे के आगे सब झूठे यहाँ

अपनों से लोग झूठ फरेब धोखा सब करते यहाँ

थोड़ी सुख के लिए लोग अंगारों पर चलते यहाँ

ज़िंदगी की नाव में परिवार…

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Posted on January 12, 2018 at 8:00pm — 1 Comment

(माँ रमा बाई

(माँ रमा बाई को यह कविता समर्पित )

माँ रमा बाई जी को कोटि कोटि वंदन

आओ हम सब करें फूलों से अभिनंदन

वक्त की पुकार समर्पित कर दो तन मन

ज्ञान की ज्योति से प्रकाशित करो वतन

अब समाज में समता लाकर रहेगें हम

नफरत सभी के दिलों से निकाल देगें हम

उनके अधूरे काम को अब पूरा करेगें हम

अज्ञान को संसार से मिटा कर रहेगें हम

जीवन के हर क्षण में याद रहे यह प्रण

टूटे दिलों को जोड़ एक माला बनाएँ हम

खुशियाँ सभी के राह में सदा बिछाएँ…

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Posted on May 27, 2017 at 3:00pm — 2 Comments

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At 10:27pm on January 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामाश्रय जी, महोत्सव में आप अपनी रचना मुख्य पृष्ठ पर महोत्सव बैनर को क्लीक कर पोस्ट कर सकते हैं . 

 
 
 

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