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Ram Ashery
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Ram Ashery commented on Ram Ashery's blog post जिंदगी का सफर
"मेरे उत्साह वर्धन के लिए आपको सहृदय आभार स्वीकार हो । "
Nov 25, 2020
Samar kabeer commented on Ram Ashery's blog post जिंदगी का सफर
"जनाब राम आश्रय जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 25, 2020
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जिंदगी का सफर

हमारा आज और कल एक सिक्के के दो पहलू हैं सुनहरे कल के लिए आज की बलि मत चढ़ा दो माना की आज ज़िंदगी कठिन है पर जीना जरूरी है उसके लिए अपने  भविष्य को बचाना है तिनके का सहारा लेकर हमें जाना है उस पार ।  हिम्मत न हार तूफान से टकरा अपने कल के लिए कठिन संघर्ष कर आया भयंकर तूफान खतरे में जग जहान है आशा की पतवार है किश्ती नदी मझधार है हिम्मत न हार हमें जाना है उस पार । मंजिल  पर दूर तक कोई नजर नहीं आता छोटा है तो क्या हुआ,पर  रिश्ता निभाता है इस भंयकर तूफान में कोई रास्ता दिखाता है  हौसला बुलंद रख विजय…See More
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passport

"आपका बहुत बहुत आभार"
Oct 11, 2019
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Oct 10, 2019
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Ram Ashery commented on Ram Ashery's blog post कागज की नाव
"आपको मेरी हौसला अफजाई के लिए तहेदिल से आभार । "
Aug 26, 2019
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न्याय की उम्मीद

जो डूब चुका है कंठ तक झूठ के सवालों में उससे ही हम न्याय की उम्मीद लगा बैठे ।  देश आज फंस चुका है गद्दारों के हाथों में हमारी आपसी मतभेद का फाइदा उठा बैठे । हमसे मांगते मंदिर का सबूत न्यायालय में भारत में भी तालिबानी फरमान सुना बैठे । राम के मंदिर के लिए लड़ रहे न्यायालय में सुबह की रोशनी में अपना अस्तित्व देख बैठे । आज न्यायालय ही खड़ा हो गया सवालों में जो संविधान को अलग रख निर्णय ले बैठे । न्यायाधीस को शर्म नहीं निर्णय सुनने में रविदासजी का मंदिर आनन फानन तोड़ बैठे । अक्षरधाम मंदिर दिखा नहीं उस…See More
Aug 26, 2019
Samar kabeer commented on Ram Ashery's blog post कागज की नाव
"जनाब आश्रय जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 25, 2019
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कागज की नाव

कागज की किस्ती और वर्षा का पानी,वह बचपन की यादें हैं बहुत याद आती आज रूठी गई दादी और वर्षा की रानी न कहती है कहानी न बरसता है पानी॥बच्चों को पता नहीं कैसे बहती है नाली छतों से गटर में बहता, बरसा का पानी गटर जब चोक हो ,सड़क पर बहे पानी  सड़के और गलियाँ नदियाँ बनके बहती ॥ वह कागज की किस्ती तभी याद आती दादी की कहानी, रिमझिम बरसता पानी बहुत याद आती वह बचपन की कहानी माँ बाप को फुरसत कहाँ कहे जो कहानी सुबह से शाम तक सभी की एक कहानी ॥बच्चों को कौन बताए अनोखी कहानी  मोबाइल में अटक गई जग की कहानी अब राजा…See More
Aug 19, 2019
Ram Ashery commented on Samar kabeer's blog post ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा
"प्यार और दुआ में ताकत है वह गज़ब की  बहे जिस दिशा में मिटा दे गर्दिश वहाँ की  ओ बी ओ की सफलता है संपादक मण्डल की   शत्रु को मित्र में बदल दे ख्वाहिस समीर की ॥     "
Aug 18, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
surat
Native Place
Allahabad
Profession
service
About me
i am working in the institution as a teacher

क्यारी देखी फूल बिन ,माली हुआ उदास ।

कह दी मन की बात सब, जा पेड़ों के पास ॥

हिन्दी को समृद्धि करन हित, मन में जागी आस ।

गाँव गली हर शहर तक ,करना अथक प्रयास ॥

कदम बढ़ाओ सड़क पर ,मन में रख कर विश्वाश ।

मिली सफलता एक दिन ,सबकी पूरी आश ॥

सूरज चमके अम्बर में , करे तिमिर का नाश ।

अज्ञानता का भय मिटे, फैले जगत प्रकाश ॥

चंदा दमकी आसमान  ,गई जगत में छाय ।

हिन्दी पहुंची जन जन में, तब बाधा मिट जाय ॥

हिन्दी हमारी ताज अब, सबको रख कर पास ।

फूटा भांडा ढोंग का ,हुआ तिमिर का नाश ॥

घनी अंधेरी राह में जब राह न दिखती होय ।

हिन्दी साथ में तब चली, राह सुगम तब होय ॥

जब हिन्दी में बात करें, तो गर्व का अनुभव होय ।

गाँव शहर परदेश में , माथा नीच न होय ॥

पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण, चहुं दिश हिन्दी आज ।

जाति धर्म के बंधन मिटे, आयी समता आज ॥  

दूध और पानी की तरह ,मिल गए सभी समाज  ॥

पर्वत सोहे न भाल बिन, नदी बहे बिन नीर ।

देश न सोहे हिन्दी बिन , जीवन रहित शरीर ॥

ध्वज फहराए विश्व में, नभ तक जाए छाय ।

ममता जागे हृदय में , हिन्दी सभी अपनाय ॥

 मौलिक एवं प्रकाशित 

 

      

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जिंदगी का सफर

हमारा आज और कल एक सिक्के के दो पहलू हैं 

सुनहरे कल के लिए आज की बलि मत चढ़ा दो 

माना की आज ज़िंदगी कठिन है पर जीना जरूरी है 

उसके लिए अपने  भविष्य को बचाना है 

तिनके का सहारा लेकर हमें जाना है उस पार ।  

हिम्मत न हार तूफान से टकरा 

अपने कल के लिए कठिन संघर्ष कर 

आया भयंकर तूफान खतरे में जग जहान है 

आशा की पतवार है किश्ती नदी मझधार है 

हिम्मत न हार हमें जाना है उस पार । 

मंजिल  पर दूर तक कोई नजर नहीं आता 

छोटा है तो…

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Posted on November 21, 2020 at 3:00pm — 2 Comments

न्याय की उम्मीद

जो डूब चुका है कंठ तक झूठ के सवालों में 

उससे ही हम न्याय की उम्मीद लगा बैठे ।  

देश आज फंस चुका है गद्दारों के हाथों में 

हमारी आपसी मतभेद का फाइदा उठा बैठे । 

हमसे मांगते मंदिर का सबूत न्यायालय में 

भारत में भी तालिबानी फरमान सुना बैठे । 

राम के मंदिर के लिए लड़ रहे न्यायालय में 

सुबह की रोशनी में अपना अस्तित्व देख बैठे । 

आज न्यायालय ही खड़ा हो गया सवालों में 

जो संविधान को अलग रख निर्णय ले बैठे । 

न्यायाधीस को शर्म नहीं…

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Posted on August 24, 2019 at 8:30pm

कागज की नाव

कागज की किस्ती और वर्षा का पानी,

वह बचपन की यादें हैं बहुत याद आती 

आज रूठी गई दादी और वर्षा की रानी 

न कहती है कहानी न बरसता है पानी॥

बच्चों को पता नहीं कैसे बहती है नाली 

छतों से गटर में बहता, बरसा का पानी 

गटर जब चोक हो ,सड़क पर बहे पानी  

सड़के और गलियाँ नदियाँ बनके बहती ॥ 

वह कागज की किस्ती तभी याद आती 

दादी की कहानी, रिमझिम बरसता पानी 

बहुत याद आती वह बचपन की कहानी 

माँ बाप को फुरसत कहाँ कहे जो…

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Posted on August 18, 2019 at 3:00pm — 2 Comments

रोटी की मजदूर

यहाँ रोटी के चक्कर में फिरता

गाँव से शहर काम नहीं मिलता

रात को थका हुआ घर लौटता

मजदूर दुखी मन से यह कहता ।

अब घर का राशन बच्चे की फीस

बड़ी मुश्किल से कटेगें दिन तीस ।

विकास की गति है पंद्रह से बीस

चली है दिल्ली से ले शुभ अशीष ।

सड़क पर बना पुल जब गया टूट

किस्मत की गाड़ी को लिया लूट

प्रतिपक्ष कहते रहे सभी एक जुट

विपक्षी एकता में डाल दी फूट ।

संसद से सड़क तक झूठ ही झूठ

जंगल में बचे सिर्फ ठूठ ही ठूठ

मानवता गई इस जहां से… Continue

Posted on March 24, 2018 at 4:42pm — 5 Comments

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At 10:27pm on January 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामाश्रय जी, महोत्सव में आप अपनी रचना मुख्य पृष्ठ पर महोत्सव बैनर को क्लीक कर पोस्ट कर सकते हैं . 

 
 
 

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