For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कविता जब तुम,होती हो संग-संग

जीवन जीने का चाव

जहां उग जाता है

कविता कहने का भाव

वहाँ से आता है

अनुभव के बाजारों से

जो लेकर आता हूँ 

उसे ही कविता बना के

जीवन में, मैं गाता हूँ

सुख-दुःख हों जीवन के

चाहे हों उत्थान-पतन

सब कविता की कड़ियों में

छिपा लेता हूँ , करके जतन

जीवन में रहते हैं मेरे नव-रंग

कविता जब तुम होती हो संग-संग !!

© हरि प्रकाश दुबे

"मौलिक व अप्रकाशित" 

 

Views: 230

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Hari Prakash Dubey on December 2, 2014 at 7:59pm

आपका बहुत - बहुत धन्यवाद आदरणीय राम शिरोमणि पाठक जी !

Comment by ram shiromani pathak on December 2, 2014 at 1:20pm

आदरणीय दुबे जी सुन्दर प्रस्तुति  //बधाई आपको 

Comment by Hari Prakash Dubey on December 1, 2014 at 8:40pm

रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत - बहुत धन्यवाद आदरणीया राजेश कुमारी जी !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 1, 2014 at 6:27pm

सुन्दर प्रस्तुति बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by Hari Prakash Dubey on December 1, 2014 at 12:55pm

आदरणीय डॉक्टर साहब ,आपका हार्दिक आभार ,मैं हिंदी भाषा का छात्र तो नहीं रहा ,न ही आप लोगों जैसा लिख पता हूँ ,पर आप जैसे लोगों के स्नेह से अभिभूत हो जाता हूँ ,प्रेरणा देने के लिए आपका हृदय से आभार ,सादर !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 1, 2014 at 10:50am

जीवन जीने का चाव

जहां उग जाता है

कविता कहने का भाव

वहाँ से आता है--------------- शुभान अल्लाह i

Comment by Hari Prakash Dubey on November 30, 2014 at 9:19pm

आदरणीय श्री गणेश जी "बागी "सार्थक प्रतिक्रिया के लिए  आपका हार्दिक आभार, एवं आपके मागदर्शन के लिए भी ! सादर !

Comment by Hari Prakash Dubey on November 30, 2014 at 9:14pm

सार्थक प्रतिक्रिया के लिए  आपका आभार सोमेश भाई !


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 30, 2014 at 3:37pm

सुन्दर भाव, तनिक और मांजने की जरुरत है, बधाई इस प्रयास पर।

Comment by somesh kumar on November 30, 2014 at 9:31am

शायद एक लेखक का जीवन यही है जोदेखा/पढ़ा /महसूस किया उसे रचना में संजो लिया ,सुंदर प्रयास 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, ग़ज़ल पढ़ने के लिए और हौसला बढ़ाने के लिए बहुत शुक्रिया। इस मंच पर मैं आपकी…"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post झूठी बातें कह कर दिनभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
10 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post झूठी बातें कह कर दिनभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, आदाब। बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है, शेर दर शेर दाद और मुबारक़बाद क़ुबूल करें।"
12 hours ago
vijay nikore posted a blog post

प्यार का प्रपात

प्यार का प्रपातप्यार में समर्पणसमर्पण में प्यारसमर्पण ही प्यारनाता शब्दों का शब्दों से मौन छायाओं…See More
14 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)

रमल मुसम्मन महज़ूफ़फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन2 1 2 2 / 2 1 2 2 / 2 1 2 2 / 2 1 2सारी दुनिया से…See More
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ये कैसी बहार है (ग़ज़ल)
"आदरणीय समर कबीर साहब, सादर प्रणाम। हौसला-अफ़ज़ाई के लिए बेहद शुक्रगुज़ार हूँ। आपकी उपस्थिति और…"
yesterday
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है, बधाई स्वीकार करें । आपने ग़ज़ल के अरकान ग़लत लिख…"
yesterday
Samar kabeer commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ये कैसी बहार है (ग़ज़ल)
"जनाब रवि भसीन 'शाहिद' साहिब आदाब,बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post झूठी बातें कह कर दिनभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए आभार.."
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post जायदाद के हकदार
"अरुण जी  सराहना के लिए आभार "
yesterday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service