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अतुकांत कविता : केसर के फूल (गणेश जी बागी)

अतुकांत कविता : केसर के फूल

चौक गया

यह देखकर 

स्कूल के फर्श पर

फैला गाढ़ा रंग
बिलकुल वैसा ही था
जैसा
कुछ वर्ष पहले था
मुंबई के प्लेटफॉर्म पर  
कोई अंतर नहीं
एकदम सुर्ख़ लाल रंग
उपजाऊ भूमि
बो दिया बारूद
इस उम्मीद में

कि .........
केसर फूलेंगे ।

(मौलिक व अप्रकाशित)
पिछला पोस्ट => लघुकथा : सुकून

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Comment

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 1, 2015 at 5:09pm

इस कविता पर आपकी उपस्थिति और सराहना उत्साह्वार्धित करती है, बहुत बहुत आभार आदरणीय भुवन निस्तेज जी. 

Comment by भुवन निस्तेज on December 22, 2014 at 2:12pm
मानव संवेदना को झझोंड देने वाली कविता..... बधाई स्वीकार करें...

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 21, 2014 at 7:34pm

आदरणीय गिरिराज भाई साहब, आपकी सराहना उत्साहवर्धन करती है, बहुत बहुत आभार .


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 21, 2014 at 7:33pm

आदरणीय सौरभ भईया, आपका आशीर्वाद प्राप्त होने के बाद रचना सार्थक हो जाया करती है, मुक्तकंठ से आपकी सराहना निश्चित ही उत्साहवर्धन करती है, बहुत बहुत आभार .


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 21, 2014 at 7:31pm

आदरणीया अर्चना तिवारी जी, कविता मूल रूप में आप तक पहुँच सकी इसकी ख़ुशी है, उत्साहवर्धन हेतु हृदय से आभार .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 21, 2014 at 11:57am

आदरणीय बाग़ी जी , केसर की चाह मे बारूद ! बौत कम शब्दों में बहुत सटीक बात कही आपने ! रचना के लिये हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 21, 2014 at 11:33am

भाई गणेशजी, आपकी यह रचना सीधी-सादी भाषा में सटीक बातें करती हुई है. कई बार ऐसी बातों का होना आवश्यक लगता है.
’केसर फूलेंगे’ जैसी उम्मीद कभी राक्षसी नहीं हो सकती. लेकिन इस उम्मीद की ओट में यदि घृणित को साधने की सोच हो, तो ऐसी उम्मीद लगाने वालों की प्रवृति में खोट साफ दिखने लगता है. कवि संवेदनशील ही नहीं होता बल्कि समाज को यथार्थ की कसौटियों के प्रति इंगित भी करता है. ऐसे में, आपका प्रयास वस्तुतः श्लाघनीय है.
इस रचना केलिए हार्दिक बधाई स्वीकारें.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 21, 2014 at 12:12am

कविता आपको अच्छी लगी इसके लिए आभार प्रिय सोमेश जी .


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 21, 2014 at 12:11am

सराहना हेतु आभार आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी .


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 21, 2014 at 12:10am

आदरणीय गोपाल नारायण जी, कविता आपको अच्छी लगी, लेखन कर्म सार्थक हुआ, आभार व्यक्त करता हूँ .

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