For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

व्यंग्य - बुखार के मौसम में...

जिस तरह परीक्षा के मौसम में छात्र, अभी दिमागी बुखार से तप रहे हैं, कुछ ऐसा ही देश-दुनिया में विश्वकप क्रिकेट का खुमारी बुखार छाया हुआ है। इन बुखारों के मौसम में शायद ही कोई बच पा रहा है और हर कोई किसी न किसी तरह से मानसिक तौर पर बुखार की चपेट में है। क्रिकेट की खुमारी तो ऐसी छाई है, जिससे सटोरियों की चल निकली है तथा वे हर गंेद व रन पर मौज कर रहे हैं। हालात यह है कि वे खाईवाली मैदान में नोटों की गड्डी की गरमाहट से तप रहे हैं। बेचारी तो देश की जनता है, जो न तो कुछ बोल सकती है और न ही हुक्मरानों को इनकी फिक्र है ? जनता के भोलेपन तथा सहनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश में भ्रष्टाचार पर भ्रष्टाचार हो रहे हैं और देश की करोड़ों जनता चुप बैठी है ? फिलहाल आम जनता केवल एक ही बुखार से तप रही है और वो है, महंगाई। क्या करें, गरीबों के हिस्से में जैसे लिखा हुआ है कि कम कमाओ-कम खाओ ? और बदहाली में जीना सीख जाओ।

देश के प्रति समर्पण की भावना हमारी और क्या हो सकती है, कोई कुछ भी करते रहें और हम चुप बैठे रहें, देश लुट रहा है तो लूटने दो ? भ्रष्टाचार पर भ्रष्टाचार हो और रोज घपलेबाज व घोटालेबाज पैदा हों। गरीबों को दो जून की रोटी के सिवाय और क्या चाहिए ? छोटा सा पेट भरने के लिए रोजी-मजदूरी ही भाग्य में है। गरीबों के हिस्से में पसीना बहाना ही लिखा है ? नोट कमाना तथा नोटों की गरमी का अहसास, केवल मोटी चमड़ी व बड़े पेट वाले भ्रष्टाचारियों को होता है, तभी तो सीने में नोट लादकर रखने की आदत इन जैसों को ही है। भला, कोई आम व्यक्ति नोटों की गरमाहट सहन कर सकता है ? वह तो बरसों से ऐसे ही गरीबी के बुखार से तप रहा है। जिस बीमारी का न तो इलाज अब तक ढूंढा जा सका है और न ही इस दर्द की कोई दवा तलाशी जा सकी है। हर बार सरकार यही कहती है कि गरीबी खत्म कर दी जाएगी, लेकिन गरीब तो आज भी वहीं हैं, लेकिन भ्रष्टाचारियों का बोलबोला है और दिन-दूना, रात चौगुना कर मालदार भट्ठी के मालिक बन बैठे हैं।
देश के दगाबाज कब जनता की गाढ़ी कमाई हथिया, सफेदपोश नामचीन बनकर गरीबों का खून चूस लेता है और देश भ्रष्टाचार के बुखार में तप रहा है। यह बीमारी संक्रामक होती जा रही है। आने वाला समय और फिर भयावह हो सकता है, क्योंकि गरीबी हटाने की दवा अब तक नहीं खोजी जा सकी है, कुछ ऐसा ही हाल भ्रष्टाचार का भी है। शायद, भ्रष्टाचारी व घपलेबाज भी इस बात को समझ रहे हैं, तभी तो घटिया करतूत से बाज आने का नाम नहीं ले रहे हैं। भ्रष्टाचारी, दीमक की तरह देश को चाट रहे हैं और हम टकटकी लगाए देख रहे हैं। इस तरह आम जनता गरीबी व महंगाई की आग में तप व जल रही हैं। यही तो है देश में बेमौसम बुखार का, न उतरने वाला तपन।


राजकुमार साहू
लेखक व्यंग्य लिखते हैं

जांजगीर, छत्तीसगढ़
मोबा - 098934-94714

Views: 350

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rash Bihari Ravi on March 11, 2011 at 1:38pm
भ्रष्टाचारी, दीमक की तरह देश को चाट रहे हैं और हम टकटकी लगाए देख रहे हैं। इस तरह आम जनता गरीबी व महंगाई की आग में तप व जल रही हैं। यही तो है देश में बेमौसम बुखार का, न उतरने वाला तपन। bah no bal me chhakka bahut khubsurat lajabab

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service