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फूल नहीं तो पत्थर कह दो

फूल नहीं तो पत्थर कह दो।
दो बातें पर हंसकर कह दो ।।

आज मुकम्मल कर दो ऐसे ।
एक दफे बस दिलबर कह दो ।।

साथ चलूँगा मरते दम तक।
मुझको अपना रहबर कह दो।।

माँ बाबा की बात सुने सब।
ऐसा सपनों में घर कह दो ।।

ऊँच नीच सम भाव रहा जो।
उसको भी तो बेहतर  कह दो।।

सदियों तक सुनने में आये। 
एक ग़ज़ल बस जमकर कह दो।।
*******************
राम शिरोमणि पाठक
मौलिक।अप्रकाशित

Views: 938

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Comment by गिरिराज भंडारी on December 27, 2014 at 9:10pm

अच्छी गज़ल हुई है , आदरणीय राम भाई , बधाई स्वीकार करें ।

Comment by ram shiromani pathak on December 27, 2014 at 7:22pm
श्याम जी हार्दिक आभार आपका।।सादर
Comment by ram shiromani pathak on December 27, 2014 at 3:30pm
श्याम जी हार्दिक आभार आपका।।सादर
Comment by Shyam Narain Verma on December 27, 2014 at 2:35pm

बेहतरीन ग़ज़ल की हार्दिक शुभकामनायें 

Comment by ram shiromani pathak on December 27, 2014 at 9:31am
आदरणीया वंदना जी बहुत बहुत आभार आपका।।सादर
Comment by ram shiromani pathak on December 27, 2014 at 9:30am
आदरणीय वीनस भाई बहुत बहुत आभार आपका।।सादर
Comment by vandana on December 27, 2014 at 6:19am

बहुत बढ़िया ग़ज़ल आदरणीय 

Comment by वीनस केसरी on December 27, 2014 at 1:10am

बहुत खूब

अच्छी ग़ज़ल हुई है

Comment by ram shiromani pathak on December 27, 2014 at 12:19am
अनुराग भाई बहुत आभार आपका
Comment by ram shiromani pathak on December 27, 2014 at 12:18am
हरि प्रकाश जी उत्साह वर्धन हेतु बहुत आभार

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