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आँधियों में ही दीपक जलाते हैं हम

२१२/  २१२/    २१२   /२१२

आँधियों में ही दीपक जलाते हैं हम

आहिनी हैं इरादे दिखाते हैं हम

 

आपको देखते देखते क्या हुआ!

आईये दिल की धड़कन सुनाते हैं हम

 

चाँद के सामने चाँद कैसा लगे

सोच कर भी न कुछ सोच पाते हैं हम

 

आईने पर हमारी नजर जब पडी

सोच कर हंस दिए क्या छुपाते हैं हम

 

बेबफा ही सही प्यार तो प्यार है

याद आता है जितना भुलाते हैं हम

 

दोस्तों पे यकी आज भी है हमें

दोस्ती की कसम अब भी खाते हैं

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 6, 2015 at 4:24pm

आदरणीय राम जू ..रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए  तहे दिल धन्यवाद सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 6, 2015 at 4:23pm

आदरणीय शिज्जू जी ..मेरी रचनाओं को आपका स्नेह मिला है ..आपके मशविरे पर अमल कर रहा हूँ और सतत कोशीश कर रहा हूँ ..बहुत बहुत धन्यवाद सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 6, 2015 at 4:21pm

आदरणीय अजय जी ..रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल धन्यवाद सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 6, 2015 at 4:19pm

आदरणीय गिरिराज भाई साब ..रचना धर्मिता के इस सफ़र पर आप सदैव मेरे साथ हैं ..कभी मार्गदर्षन कभी उत्साह वर्धन ..आपका स्नेह यूं ही  मिलता रहे ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 6, 2015 at 4:17pm

आदरणीय हरी प्रकाश जी ..रचना पर आपकी उत्साहित करती प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल धन्यवाद सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 6, 2015 at 4:17pm

आदरणीय गोपाल सर ..रचना आपको अच्छी लगी यह मेरे लिए सौभाग्य है ..आप का स्नेह यूं ही मिलता रहे सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 6, 2015 at 4:14pm

आदरणीय बागी सर ..आपकी इस प्रतिक्रिया से मुझे बहुत उर्जा मिली है ..टंकण में हुई कमी को शीघ्र ही दूर करने की कोशिस करूंगा .हार्दिक धन्यवाद के साथ सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 6, 2015 at 4:09pm

आदरणीय मिथिलेश जी आपके उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया से मेरा मनोबल बहुत बढ़ा है आपके मशविरे पर अमल करते हुए सुधर के लिए एडमिन महोदय को प्रेषित करूंगा ..सादर धन्यवाद 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 6, 2015 at 4:06pm

आदरणीय विजय सर ..आपका स्नेह यूं ही मिलता रहे इसी कामना के साथ सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 6, 2015 at 4:06pm

आदरणीय अनुराग जी ..रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल धन्यवाद सादर 

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