For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल :- खार में भी कली खिला देगा

ग़ज़ल :- खार में भी कली खिला देगा

खार में भी कली खिला देगा ,

आदमी जब भी मुस्कुरा देगा |

 

यह तो दस्तूर है ज़माने का ,

नाम लिख कर कोई मिटा देगा |

 

खत को उठेंगे जब भी हाथ मेरे ,

मन मेरा आपका पता देगा |

 

जल रही हैं जड़ें बगावत में ,

पेड़ को अब पवन गिरा देगा |

 

इन पहाड़ों पर रोशनी न करो ,

आदमी घर यहाँ बना लेगा |

 

ये लगन मुझमे किस वजह से है ,

काम मेरा तुम्हे बता देगा |

 

खुद घिरा है वो बद्दुआओं में ,

वो यकीनन तुम्हे दुआ देगा |

 

आदमी सिर्फ एक बहाना है ,

जब भी देगा हमें खुदा देगा |

 

एक अभिनव फकीर आया है ,

बस्तियों में अलख जगा देगा |

 

(@अभिनव अरुण # १३-०२-२००४)

Views: 642

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abhinav Arun on April 27, 2012 at 3:15pm

punah abhaar adarniy shri ambarish ji :-))

Comment by Er. Ambarish Srivastava on April 27, 2012 at 2:15pm

स्वागत है मित्र ! बहुत अच्छा लिखते हैं आप !

Comment by Abhinav Arun on April 27, 2012 at 2:08pm
परम आदरणीय श्री अम्बरीश ji आप जैसे विद्वान् मनीषी का आशीर्वाद पा गदगद हूँ | हार्दिक आभार आपका !! स्नेह बना रहे थोडा कुछ लिखने का क्रम चलता रहे यही प्रयास रहता है !! 
Comment by Er. Ambarish Srivastava on April 27, 2012 at 1:52pm

//आदमी सिर्फ एक बहाना है ,

जब भी देगा हमें खुदा देगा |//


//खुद घिरा है जो बद्दुआओं में ,

वो यकीनन तुम्हे दुआ देगा |//

मित्र 'अभिनव' जी, यथार्थ के धरातल पर सार्थक भावों से लबरेज सभी अशआर बहुत प्रभावशाली बन पड़े हैं |  इस निमित्त हार्दिक बधाई स्वीकारें !

Comment by Abhinav Arun on April 27, 2012 at 1:29pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी आपने ग़ज़ल पसंद की हार्दिक आभार आपका !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 27, 2012 at 1:10pm

baut umda ghazal kshama der se padhi ya ye mere join karne se pahli hai.bahut pasand aaya har sher

Comment by Abhinav Arun on April 27, 2012 at 12:37pm

संदीप जी आपके स्नेह से अभिभूत हूँ हार्दिक आभार आपका !! आपके द्वारा उद्धृत शेर भी बाकमाल है |

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 25, 2012 at 11:44am

देर से ही सही मगर यहाँ पहुँच गया और पहुंचा क्या... बस मज़ा आ गया भईया..! एक शे'र याद आ गया आपकी ग़ज़ल पढ़ कर...

मेरा क़ातिल ही मेरा मुन्सफ़ है,

क्या मेरे हक़ में फ़ैसला देगा; 

:-) :-) :-) :-) :-) :-) :-) :-)

Comment by Abhinav Arun on March 18, 2011 at 7:53pm
शुक्रिया साहिल जी आपके शब्द मेरी लेखनी को उर्जा और दिशा देंगे | आभार |
Comment by Saahil on March 16, 2011 at 8:17pm

खत को उठेंगे जब भी हाथ मेरे ,

मन मेरा आपका पता देगा |

 

आदमी सिर्फ एक बहाना है ,

जब भी देगा हमें खुदा देगा |

 

बहुत ही खूबसूरत अशआरों से सजी हुई उम्दा ग़ज़ल.......

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
8 hours ago
Admin posted discussions
9 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Feb 15
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
Feb 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
Feb 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service