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ग़ज़ल :- खार में भी कली खिला देगा

ग़ज़ल :- खार में भी कली खिला देगा

खार में भी कली खिला देगा ,

आदमी जब भी मुस्कुरा देगा |

 

यह तो दस्तूर है ज़माने का ,

नाम लिख कर कोई मिटा देगा |

 

खत को उठेंगे जब भी हाथ मेरे ,

मन मेरा आपका पता देगा |

 

जल रही हैं जड़ें बगावत में ,

पेड़ को अब पवन गिरा देगा |

 

इन पहाड़ों पर रोशनी न करो ,

आदमी घर यहाँ बना लेगा |

 

ये लगन मुझमे किस वजह से है ,

काम मेरा तुम्हे बता देगा |

 

खुद घिरा है वो बद्दुआओं में ,

वो यकीनन तुम्हे दुआ देगा |

 

आदमी सिर्फ एक बहाना है ,

जब भी देगा हमें खुदा देगा |

 

एक अभिनव फकीर आया है ,

बस्तियों में अलख जगा देगा |

 

(@अभिनव अरुण # १३-०२-२००४)

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Comment

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Comment by Abhinav Arun on April 27, 2012 at 3:15pm

punah abhaar adarniy shri ambarish ji :-))

Comment by Er. Ambarish Srivastava on April 27, 2012 at 2:15pm

स्वागत है मित्र ! बहुत अच्छा लिखते हैं आप !

Comment by Abhinav Arun on April 27, 2012 at 2:08pm
परम आदरणीय श्री अम्बरीश ji आप जैसे विद्वान् मनीषी का आशीर्वाद पा गदगद हूँ | हार्दिक आभार आपका !! स्नेह बना रहे थोडा कुछ लिखने का क्रम चलता रहे यही प्रयास रहता है !! 
Comment by Er. Ambarish Srivastava on April 27, 2012 at 1:52pm

//आदमी सिर्फ एक बहाना है ,

जब भी देगा हमें खुदा देगा |//


//खुद घिरा है जो बद्दुआओं में ,

वो यकीनन तुम्हे दुआ देगा |//

मित्र 'अभिनव' जी, यथार्थ के धरातल पर सार्थक भावों से लबरेज सभी अशआर बहुत प्रभावशाली बन पड़े हैं |  इस निमित्त हार्दिक बधाई स्वीकारें !

Comment by Abhinav Arun on April 27, 2012 at 1:29pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी आपने ग़ज़ल पसंद की हार्दिक आभार आपका !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 27, 2012 at 1:10pm

baut umda ghazal kshama der se padhi ya ye mere join karne se pahli hai.bahut pasand aaya har sher

Comment by Abhinav Arun on April 27, 2012 at 12:37pm

संदीप जी आपके स्नेह से अभिभूत हूँ हार्दिक आभार आपका !! आपके द्वारा उद्धृत शेर भी बाकमाल है |

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 25, 2012 at 11:44am

देर से ही सही मगर यहाँ पहुँच गया और पहुंचा क्या... बस मज़ा आ गया भईया..! एक शे'र याद आ गया आपकी ग़ज़ल पढ़ कर...

मेरा क़ातिल ही मेरा मुन्सफ़ है,

क्या मेरे हक़ में फ़ैसला देगा; 

:-) :-) :-) :-) :-) :-) :-) :-)

Comment by Abhinav Arun on March 18, 2011 at 7:53pm
शुक्रिया साहिल जी आपके शब्द मेरी लेखनी को उर्जा और दिशा देंगे | आभार |
Comment by Saahil on March 16, 2011 at 8:17pm

खत को उठेंगे जब भी हाथ मेरे ,

मन मेरा आपका पता देगा |

 

आदमी सिर्फ एक बहाना है ,

जब भी देगा हमें खुदा देगा |

 

बहुत ही खूबसूरत अशआरों से सजी हुई उम्दा ग़ज़ल.......

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