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सोचता हूँ मैं ,तुम कौन हो ?

सोचता हूँ मैं ,तुम कौन हो ?

 

सखी हो ,ईश्वर हो,

तुम मेरा प्यार हो,

तुम मेरा संसार हो !

 

करुणा हो, दुलार हो,

प्रेम की पुकार हो ,

तुम जीवन-आधार हो !

 

जीवन हो, स्पन्दन हो,

साँसों का गुंजन हो ,

तुम मेरा चिंतन हो !

 

हिम्मत हो जोश हो,

शक्ति का श्रोत हो,

प्रेम से ओत-प्रोत हो !

 

गगन हो , सर्जन हो,

सृष्टी का वरदान हो,

तुम मेरा अभिमान हो !

 

सरल हो , सुबोध हो,

स्पष्टता का बोध हो,

जीवन का अनुरोध हो !

 

सर्दी की धूप हो,

गर्मी की छावं हो,

अपना वाला गाँव हो !

 

तुम मेरा मृदुभाव हो

तुम मेरा स्वभाव हो

तुम मेरा प्रभाव हो !

 

तुम मैं हूँ , मैं तुम हो !!

 

© हरि प्रकाश दुबे

"मौलिक व अप्रकाशित"

 

 

 

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Comment

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Comment by Hari Prakash Dubey on January 21, 2015 at 9:50pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी सर आपका बहुत - बहुत धन्यवाद ! सादर

Comment by Hari Prakash Dubey on January 21, 2015 at 9:48pm

आदरणीय सुशील सरना सर ह्रदय से आभार आपका , सादर !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 21, 2015 at 10:49am

क्या बात है ... आदरणीय हरि प्रकाश भाई , लाजवाब रचना हुई है , बधाइयाँ ।

Comment by Hari Prakash Dubey on January 20, 2015 at 8:05pm

आदरणीय वीरेन्द्र मेहता जी हार्दिक आभार आपका ! सादर 

Comment by Sushil Sarna on January 20, 2015 at 7:55pm

सरल हो , सुबोध हो,
स्पष्टता का बोध हो,
जीवन का अनुरोध हो !

वाह बहुत खूबसूरत प्रवाहमयी काव्य प्रस्तुति -हार्दिक बधाई आदरणीय हरि प्रकाश दुबे जी।

Comment by Hari Prakash Dubey on January 20, 2015 at 7:34pm

आदरणीय इं. गणेश जी “बाग़ी” सर, आपका स्नेह और आपकी सराहना सदैव अभिभूत कर देती है.. बहुत बहुत धन्यवाद. सादर !

Comment by Hari Prakash Dubey on January 20, 2015 at 7:30pm

गुरुदेव आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर , सादर धन्यवाद! 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 20, 2015 at 7:13pm

आदरणीय अजय शर्मा जी , रचना पर आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए आपका  बहुत बहुत आभार !

Comment by Hari Prakash Dubey on January 20, 2015 at 7:08pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी, आपके स्नेह, और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ ... सादर  !  

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on January 20, 2015 at 6:02pm

Bahut sundar Hari parkash dubeyji....:Sochata hu mai , Tum kon ho.

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