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" क्या हुआ सलीम साहब , चेहरा इतना उतरा हुआ क्यूँ है ? कहीं फिर इस बार टिकट का मसला तो नहीं फंस गया "|
" नहीं , कुछ नहीं , बस यूँ ही तबीयत कुछ नासाज़ लग रही है "| टाल तो दिया उन्होंने लेकिन अंदर ही अंदर कुछ खाए जा रहा था | पिछली बार भी यही हुआ था , आखिरी समय तक आश्वासन मिलता रहा था कि सीट आपकी पक्की है , इस बार भी उम्मीद नहीं दिख रही |
अगले दिन उन्होंने अख़बारों में खबर छपवा दी " सलीम साहब ने अपनी पार्टी का टिकट ठुकराया "| शाम तक उनको दूसरी पार्टी ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया |
मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on February 3, 2015 at 12:07pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय खुर्शीद खैरादी जी ..

Comment by khursheed khairadi on February 3, 2015 at 9:23am

आदरणीय विनय कुमार जी ,सटीक एवं समयानुकूल चयन हेतु सादर अभिनन्दन |

Comment by विनय कुमार on January 29, 2015 at 9:39pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय श्याम मठपाल जी ..

Comment by Shyam Mathpal on January 29, 2015 at 8:32pm

Aadarniya vinay kumar ji,

Aaj ki rajniti ka ek sahi chitran kiya hai. Dil se badhai

Cheharon par chehari hain

Yon mat dekhiye ghav bahut gahre hai.

Comment by विनय कुमार on January 29, 2015 at 12:31am

बहुत बहुत आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी..

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 28, 2015 at 9:43pm

राजनीति का सच  i बधाई  i

Comment by विनय कुमार on January 28, 2015 at 7:15pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय वीर मेहता जी..

Comment by विनय कुमार on January 28, 2015 at 7:15pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया जी..

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on January 28, 2015 at 5:58pm

Bahut Khoob Aadhrniya Vinay Kumar ji....Mokkaparastha logo ki neeyat kitane sundar shabado me prastoot ki hai aapne....

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on January 28, 2015 at 11:38am

वाह ! बहुत खूब. अब तो राजनीति में दल बदलना मानो एक प्रथा के सामान हो गया है.

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