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ठण्ड भयानक पड़ने लगी थी और विभिन्न समाजसेवी संस्थाएं रोज लोगों से अपील कर रही थीं कि सड़क के किनारे रह रहे लोगों को गर्म वस्त्र दान करें | सड़क पर तमाम न्यूज़ चैनल की गाड़ियां घूम रही थीं और इन कार्यक्रमों को दिखा रही थीं |
उस मोहल्ले के आखीर में भी एक भिखारी सड़क पर पड़ा हुआ था | कुछ लोगों ने उसे ऊनी कम्बल इत्यादि दान किये और ये भी उन चैनल्स ने कैमरों में कैद किया लेकिन उसकी हल्की बुदबुदाहट पर किसी ने ध्यान नहीं दिया |
सुबह वो भिखारी मरा पड़ा था | लोग खाने के लिए देना भूल गए थे |

मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on January 26, 2015 at 3:01pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय गणेश जी बागी जी |

Comment by विनय कुमार on January 26, 2015 at 3:01pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 25, 2015 at 5:59pm

एक प्रभावशाली लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय विनयजी. 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 25, 2015 at 2:42pm

अच्छी लघुकथा आदरणीय विनय सिंह जी. बधाई.

Comment by विनय कुमार on January 24, 2015 at 8:40pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया जी..

Comment by विनय कुमार on January 24, 2015 at 8:40pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी..

Comment by विनय कुमार on January 24, 2015 at 8:38pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय राहुल डांगी जी..

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on January 24, 2015 at 7:49pm

मर्मस्पर्शी लघुकथा, आदरणीय विनय जी. हार्दिक बधाई

Comment by Hari Prakash Dubey on January 24, 2015 at 7:38pm

आदरणीय विनय कुमार जी, बधाई आपको सार्थक ,सुन्दर लघुकथा ।

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 24, 2015 at 6:55pm
जिन्दगी और दुनिया की हकिकत बयाँ करती हुई रचना! सुन्दर!

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