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ग़ज़ल .........;;;गुमनाम पिथौरागढ़ी

2122 2122 212

जब हमें दिल का लगाना आ गया
राह में देखो ज़माना आ गया


ख़त तुम्हारा देखकर बोले सभी
खुशबू का झोंका सुहाना आ गया


इक पता लेके पता पूंछे चलो
बात करने का बहाना आ गया


नाम तेरा जपते जपते यूँ लगे
अब तुझे ही गुनगुनाना आ गया


ज़िन्दगी रफ़्तार में चलती रही
मौत बोली अब ठिकाना आ गया

बेरुखी ने ही दिखाया गई हमें
फूल पत्थर पर चढ़ाना आ गया


शख्स इक गुमनाम देखा बोले सब
शहर में देखो दिवाना आ गया


मौलिक व अप्रकाशित


गुमनाम पिथौरागढ़ी

Views: 822

Comment

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Comment by gumnaam pithoragarhi on January 31, 2015 at 7:48am

धन्यवाद मिथिलेश जी विस्तार से समीक्षा के लिए वाकई रचना लिखना सफल रहा आपकी पारखी नज़र पड़ी फिर धन्यवाद .............


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 31, 2015 at 5:16am

बहुत सुन्दर मतला हुआ है.

ईमेल/ई मेसेज के जमाने में ख़त वाला शेर पढ़कर सही में लग रहा है "खुशबू का झोंका सुहाना आ गया"

इक पता लेके पता पूंछे चलो 
बात करने का बहाना आ गया....... जबरदस्त... क्या बहाना ढूँढा है 

नाम तेरा जपते जपते यूँ लगे 
अब तुझे ही गुनगुनाना आ गया..... वाह 

 

ज़िन्दगी रफ़्तार में चलती रही 
मौत बोली अब ठिकाना आ गया ... बेहतरीन 

बेरुखी ने ही दिखाया गई हमें 
फूल पत्थर पर चढ़ाना आ गया...  ये समझ नहीं आया 

मक्ता भी शानदार ..... बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिल से दाद हाज़िर है 

 

शख्स इक गुमनाम देखा बोले सब 
शहर में देखो दिवाना आ गया

Comment by gumnaam pithoragarhi on January 30, 2015 at 8:26pm
धन्यवाद हरी प्रकाश जी ................
Comment by Hari Prakash Dubey on January 30, 2015 at 6:47pm

बहुत  खूब गुमनाम भाई ...ज़िन्दगी रफ़्तार में चलती रही 
मौत बोली अब ठिकाना आ गया ....शानदार , बधाई आपको !

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