For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जीवन का ताना

अकेला उदास डोलता रहा

बाना कहाँ मिला

बुनने को

सच के ताने को

झूठे बानों से

बुनते रहे

एक जख्मी चादर

फरेब के सर पर ओढ़ा

सब्र के कारवाँ चलते रहे

जीने की रिवायत से

समझोता करते रहे

बिन प्यार की

बेरंग चादर ओढ़े

मुखोटों की मुस्कुराहटों का

दम भरते रहे

काश बाना

प्यार की सच्चाई से

खिलता कोई

तो एक सतरंगी चदरिया

बुन लेता

और बस सो जाता चैन से

ओढ़ कर वो

प्यार की सतरंगी चादर

मोहन सेठी 'इंतज़ार'

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 669

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on March 25, 2015 at 1:00pm

अति सुन्दर ! बधाई।

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on February 19, 2015 at 3:54am

 somesh kumar जी आभार ...आप ने सही लिखा है "फिर भी अंतिम साँस तक ...बंधन निभाते जाना "

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on February 19, 2015 at 3:53am

 जितेन्द्र पस्टारिया जी बहुत बहुत धन्यवाद ....शुभकामनाएँ 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on February 19, 2015 at 3:52am

आदरणीया Pari M Shlok जी आभार ....(समझौता ..मुखौटों) को ठीक कर दूंगा अभी इसलिए नहीं कर रहा क्यूंकि ये फिर approval के लिये चली जाएगी ! 

Comment by somesh kumar on February 18, 2015 at 7:39pm

जीवन का ताना बाना 

ना जाना ना पहचाना 

फिर भी अंतिम साँस तक 

बंधन निभाते जाना |

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 18, 2015 at 6:10pm

वाह! बहुत उत्तम रचना रची आपने आदरणीय मोहन जी. बहुत-बहुत बधाई

Comment by Pari M Shlok on February 18, 2015 at 9:46am
ठीक करें समझौता ..मुखौटों ..
बहुत सुन्दर रचना सच झूठ को सुंदरता से प्रस्तुत किया आपने
Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on February 18, 2015 at 6:58am

आदरणीय:..

 Hari Prakash Dubey जी , 

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी ,

 मिथिलेश वामनकर जी ,

 Sushil Sarna जी 

आप सभी का आभार सराहना के लिये तथा मार्गदर्शन के लिये ...(जल्दी संशोधन कर दूंगा ..मिथिलेश वामनकर जी धन्यवाद बताने के लिये)

Comment by Sushil Sarna on February 17, 2015 at 7:59pm

काश बाना
प्यार की सच्चाई से
खिलता कोई
तो एक सतरंगी चदरिया
बुन लेता
और बस सो जाता चैन से
ओढ़ कर वो
प्यार की सतरंगी चादर

बहुत ही सुंदर प्रवाहमयी रचना बन पड़ी है आदरणीय  Mohan Sethi जी। आदरणीय वामनकर जी की टिप्पणी से सहमत। इस सुंदर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 17, 2015 at 5:12pm

आदरणीय मोहन जी इस सुन्दर प्रस्तुति हेतु बधाई... कुछ टंकण त्रुटियों पर ध्यानाकर्षित करते हुए संशोधन हेतु निवेदन है 

समझोता मुखोटों 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
52 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
56 minutes ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
4 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
19 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service