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खारे पानी में भी मिठास होती है .....

दर्द के दरिया में सब कुछ खारा है
तुम ना जानो ...
क्यूंकि ये दर्द तो हमारा है
वो जो परिंदा इसमें डूबा है
इसे तुमने ही वहां उतारा है !

मगर समंदर के खारे पानी में
मछलियाँ ख़ुशी से तैर रही हैं
एक दूजे से खेल रही हैं
दुखी नज़र नहीं आतीं वो
यहाँ से निकलने का कोई
उतावलापन भी नहीं दिखता उन्हें
और अगले पल की फिक्र भी नहीं !

मैं भी तो मछली बन सकता हूँ
मुठ्ठी ढीली छोड़
ग़मों को आज़ाद कर सकता हूँ
और पकड़ सकता हूँ
कुछ छोटी छोटी खुशियाँ
और जी सकता हूँ
इस दर्द के समंदर में
एक मछली की तरहां
सीख ले 'इंतज़ार' इन मछलिओं से
खारे पानी में भी मिठास होती है !!

************************************************

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 7, 2015 at 8:17am

आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया जी बहुत बहुत धन्यवाद पसंदगी के लिये ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 7, 2015 at 8:16am

आदरणीय कृष्णा जी हार्दिक आभार प्रोत्साहन हेतु  ...सादर 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on May 6, 2015 at 8:20am

वाह आदरणीय इन्तजार सर बेहतरीन कविता हुयी है,आपकी सोच का मैं कायल हूँ!नमन!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 5, 2015 at 10:03am

संघर्षमय जीवन में सकारात्मकता ढूढ लाई, आपकी इन सफल पंक्तियों पर ह्रदय से बधाई ,आदरणीय मोहन जी

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 5, 2015 at 7:25am

आदरणीय shree suneel जी आप की उपस्थिति और सराहना के लिये आभार ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 5, 2015 at 7:24am

आदरणीय Samar kabeer जी तहेदिल से शुक्रिया पसंदगी के लिये ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 5, 2015 at 7:22am

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी पसन्दगी के लिये बहुत बहुत धन्यवाद ....मंगलकामनाएँ

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 5, 2015 at 7:21am

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी आपसे सकारात्मक टिप्पणी पा कर बहुत अच्छा लगा ....हार्दिक आभार ...सादर 

Comment by shree suneel on May 5, 2015 at 2:07am
आदरणीय मोहन सेठी जी, सुन्दर संदेश देती प्रस्तुति पर बधाई आपको.
Comment by Samar kabeer on May 4, 2015 at 11:37pm
जनाब मोहन सेठी 'इंतज़ार' जी,आदाब,अल्लाह आपकी तमन्ना पूरी करे,अच्छा लिखते हो भाई,ढेरों बधाई |

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