For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

“सुनो! कितनी अच्छी हो तुम, कितना प्रेम है तुम्हारे पास मेरे लिए. मेरा शादी-सुदा होना भी तुमने अपनी गहराइयों से स्वीकार लिया है. कुछ कहो न!, ऐसा क्या है मुझमे..?”

“ मुझे, तुमसे सब कुछ मिल रहा है जो किसी से शादी के बाद जो मिलता. और मैं तुमसे अपनी मर्जी तक सम्बन्ध बनाये रख सकती हूँ, क्यूंकि तुम शादी-शुदा होने के कारण, समाज अपने परिवार और क़ानून के डर से मुझसे जबरदस्ती नहीं कर सकते. नहीं तो आजकल के बेचलर...तौबा-तौबा “

   जितेन्द्र पस्टारिया

(मौलिक व् अप्रकाशित)

Views: 849

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 8, 2015 at 9:32am

लघुकथा पर आपकी उपस्थिति सदा मनोबल बढाती है, आदरणीय डा, गोपाल जी. हार्दिक आभार आपका

सादर!

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 7, 2015 at 8:45pm

जीतू भाई

मानना पडेगा  आजकल की नारियां बोल्ड हो गयी हैं , अच्छी  कहानी .

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 6, 2015 at 9:12pm

आपने लघुकथा में कुछ शब्दों के ही उपयोग से जान डाल दी , आदरणीय सौरभ जी. आपने रचना को अपना अमूल्य समय देकर मुझे कई बार अपना ऋणी बना चुके है. यह मेरा सौभाग्य ही है और मैं सदा कर्जदार बना रहना चाहूँगा.

सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 6, 2015 at 2:05pm

"शादी न सही, मगर तुमसे मुझे वो सबकुछ कुछ मिल रहा है, जो किसीको जीवन में चाहिये..  फिर, मैं तुमसे अपनी मर्जी सम्बन्ध बनाये रख सकती हूँ, क्यूंकि तुम शादी-शुदा होने के कारण, समाज अपने परिवार और क़ानून के डर से जबरदस्ती भी नहीं कर सकते. वर्ना आजकल के बेचलर..  क्लम्सी... टोटली मेस.. तौबा-तौबा.. “

कथा पूरी .. देखिये कुछ कोशिश की मैंने

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 6, 2015 at 12:55pm

लघुकथा पर आपकी उपस्थिति और सकारात्मक प्रतिक्रिया से बहुत मनोबल मिला,आदरणीय सुरेन्द्र जी. आपका ह्रदय से आभारी हूँ.

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 6, 2015 at 12:53pm

आपकी उत्साह वर्धन करती सराहना एवं विषय को सकारात्मक रूप देती प्रतिक्रिया, लघुकथा को सार्थकता का प्रमाण दे रही है आदरणीया राजेश दीदी. आपके स्नेहिल आशीर्वाद का ह्रदय से आभारी हूँ

सादर!

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 6, 2015 at 11:30am

एक व्यंग्य ... समाज के संस्कार के गिरते स्तर को व्यक्त करती अच्छी लघु कथा.. हाँ आसानी से लोग ब्लैकमेल भी हो जाएँ डर रहे  मौज बनी रहे जब आँखों का पानी ही सूख जाए तो ऐसा ही होता है भाई
भ्रमर ५


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 6, 2015 at 11:20am

यानी लडकियाँ शादी शुदा मर्दों का फायदा उठा रही हैं ये एक भावनात्मक ब्लेकमेलिंग ,अवसरवादिता मौकापरस्ती कुछ भी कह लीजिये पर संस्कार तो ताक पर रख दिए ऐसे युवक युवतियों ने  क्या कहें ये सब हो भी रहा है आजकल ..इस कटाक्ष पूर्ण लघु कथा के लिए बधाई जितेन्द्र भैया. 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 6, 2015 at 10:35am

आदरणीय मिथिलेश जी. मैं भी आप ही की तरह छात्र हूँ, आपकी प्रोत्साहित करती प्रतिक्रिया सदा मेरा मनोबल बढाती है.

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 6, 2015 at 10:32am

आदरणीय रवि जी. आपके मार्गदर्शन हेतु आपका आभारी हूँ.. आपके सुझाव अनुसार लघुकथा में सनदेश स्पष्ट हो ,ऐसा मैंने संशोधन करने की कोशिश की है. कृपया आप अपना अमूल्य समय देकर मुझे अनुग्रहित कीजियेगा

सादर!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Monday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Sunday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
Sunday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
Saturday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
Saturday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
May 30

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service