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अंधी ममता ( लघु कथा )

" क्यों बेवजह सुबह सुबह बेटे पर चिल्ला रहे हो ।बच्चा ही तो है ।आपको भी बस बहाना चाहिए डाँटने का ।जैसे खुद से तो कभी गलती...।" मैं पूर्ण आवेग से पति से भीड़ गई थी ।
" बस बस बहुत हो गया ।चुप भी करो । या छुट्टी का पूरा दिन ख़राब करके ही मानोगी ।जैसे मैं तो उसका बाप हूँ ही नहीं।तुम्हारी तरह मैं भी ममता में अँधा हो जाऊँ तो बस ...।"
" करते रहो गुस्सा हुम् ....। आखिर एक माँ पत्नी से कैसे हार सकती है ? "
==========≠======
मौलिक एवम् अप्रकाशित

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Comment by shashi bansal goyal on May 16, 2015 at 9:29am
आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी अभिभूत हूँ कि आपने मेरे प्रयास को सराहा ।विश्वास है सदा आप मुझे ऐसे ही प्रोत्साहित और मार्गदर्शित करते रहेंगे । सादर आभार आपका।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 15, 2015 at 12:02am

अक्सर पत्नी माँ से नहीं हारती.. या जल्दी नहीं हारती. :-))
मनोदशा का बढिया चित्रण हुआ है. हार्दिक बधाइयाँ

Comment by shashi bansal goyal on May 12, 2015 at 12:10pm
आo मिथिलेश वामनकर जी हृदय तल से आभारी हूँ ।कृपया ऐसे ही मार्गदर्शित करते रहिये ।
Comment by shashi bansal goyal on May 12, 2015 at 12:09pm
शुभकामनाओं हेतु हृदय तल से आभार आo विनय कुमार जी ।
Comment by shashi bansal goyal on May 12, 2015 at 12:06pm
हार्दिक आभार आo जीतेन्द्र जी ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 12, 2015 at 4:07am

बहुत सुन्दर प्रस्तुति,

लघुकथा में स्त्री के दो रूपों को जिस खूबसूरती से उभारा है कि बस मुग्ध हूँ आपकी रचना पर.

दिल को छू गई ये प्रस्तुति 

आपको इस प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई आदरणीया शशि जी 

Comment by विनय कुमार on May 12, 2015 at 1:00am

सुन्दर प्रस्तुतीकरण पर बधाई स्वीकारें..

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 12, 2015 at 12:38am

सुंदर प्रस्तुति,आदरणीया शशि जी. बधाई आपको.

Comment by shashi bansal goyal on May 11, 2015 at 11:43pm
हार्दिक आभार एवं धन्यवाद रचना को समय देने एवं प्रोत्साहित करने हेतु आदरणीय विजय शंकर जी ।
Comment by Dr. Vijai Shanker on May 11, 2015 at 10:37pm
चित्रण तो सही है, प्रस्तुति पर बधाई, आदरणीय सुश्री शशी बंसल जी , सादर।

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