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फौजी की डायरी

फौजी की डायरी
दिनांक
१२-जून
सचमुच अगर आज ये फार्मल-मीट न होती तो मै कभी जान ही ना पाता आखिर वो भी तो हमारे जैसे ही हैं.. उनका दिल भी अपने देश के लिए धडकता है.. उनके लिए भी फ़र्ज़ जान से बढ़ कर है. मगर... उनका भी परिवार है हमारी ही तरह... माँ है. बहन है.. पत्नी है बच्चे हैं घर है वो भी अपने परिवार से बहुत प्यार करते हैं..बिलकुल हमारी तरह... वो भी देश के लिए मरना चाहतें है और परिवार के लिए जीना चाहते हैं बेवजह लडनें की चाह उनको भी नही है मगर मातृभूमि पर किसी की बुरी नज़र वो भी सहन नही कर पाते हमारी ही तरह... बरसों से जिन्हें दुश्मन समझते रहे वो भीतर से बिलकुल हमारे जैसे हैं...आज दुश्मन का नया ही चेहरा देखने को मिला... जो बिलकुल हमारे जैसा है......
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Seema Singh on May 16, 2015 at 6:54am
फौजियों के अंदर भी मानव होता है बस ये ही बतानें का प्रयास भर किया है सादर
Comment by Shubhranshu Pandey on May 15, 2015 at 7:36pm

आदरणीया सीमा जी, 

दुश्मनों मेम् मानवता तभी तक दिखती है जब तक बात चित होती है..एक बार जब जंग शुरु हो जाती है तो सारे फ़र्ज एक ओर और देश का फ़र्ज सबसे उपर हो जाता है. एक फ़ौजी के बदले उसके परिवार के किसी सदस्य की डायरी जरुर हो सकती है...

सादर.

Comment by Seema Singh on May 13, 2015 at 6:39pm
आभार सर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 13, 2015 at 6:14pm

आदरणीया सीमा जी .इस सुंदर संस्मरण के लिए हार्दिक बधाई सादर ..दिल को छूती रचना 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 12, 2015 at 11:51pm

सुंदर संस्मरण. सच है , सभी एक समान ही है जैसा हम अपनी मात्रभूमि के लिए अपने दिल में जज्बा रखते है वैसे ही हर देश का नागरिक भी और सिपाही भी. प्रस्तुति पर बधाई ,आदरणीया सीमा जी

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