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तोहफा
सुबह से घर की सफाई और किचन में जुटी नीना चौंक गई “बाप रे अतुल के आने सिर्फ दो घंटे बचे हैं और मैं भूत जैसी घूम रही हूँ. माँ आप ज़रा गैस बंद कर देना प्लीज मै नहाने जा रही हूँ.”अतुल की पसंद की पीली साड़ी में तैयार होकर आई तो माँ अर्थ पूर्ण ढंग से मुस्कुरा रही थी “वाह जी खाने से लेकर सजावट तक सब अतुल का मनपसंद, अब तो साड़ी भी.” माँ ने कहा तो नीना शरमा गई “क्या बात हुई थी वैसे तेरी? माँ ने उत्सुकता से पूछा. “आवाज़ कट रही थी माँ अतुल की. वो अमेरिका से पिछले ही सप्ताह लौटा है मुझसे मिलने तो सीधे यहीं आना चाहता था मगर माता-पिता सबसे पहलें हैं. तो अब आ रहा है उसकी माँ को अब शादी की बहुत जल्दी है” शादी के नाम पर नीना की रंगत और गुलाबी हो गई. माँ नें दुलार से नीना के सिर पर हाथ फिराते हुए कहा बेटा तूने बहुत तपस्या की. पांच साल बहुत होते हैं. “दीदी आपके लिए तो गिफ्ट-शिफ्ट भी आ रहें होगे ना” छोटे भाई ने बहन को छेड़ते हुए कहा. “वो खुद आ गया वापस इस से बड़ा क्या तोहफा होगा” माँ ने कहा. तभी बाहर घंटी बजी नीना ने दौड़ कर दरवाजा खोला.हाँ ये अतुल ही था. हाथ मे बड़ा सा पैकिट पकडे “अरे रुक क्यों गए अंदर आओ ना’” नहीं बहुत जल्दी में हूँ ये सारे बांटने हैं फिर कभी जरुर आउंगा अभी ये पकड़ो सबको आना है बहाना नही चलेगा. और नीना को कार्ड थमा कर चला और वापस मुड कर आँख दबाते हुए कहा “गज़ब लग रही हो अब तो तुम भी शादी कर ही डालो...”
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Seema Singh on May 6, 2015 at 6:24pm
आप सभी का ह्रदय से आभार....अभी मैने नया नया ही यहाँ ज्वाइन किया है। थोड़ा समय लगेगा यहाँ के तौर तरीके समझने में ।आप सब ने जो मेरा हौसला बढाया है उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 6, 2015 at 12:16am

वाह! बहुत सुंदर प्रस्तुति ,आदरणीया सीमा जी.हार्दिक  बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 5, 2015 at 10:52pm

वाकई जोर का झटका धीरे से  दे गई लघुकथा 

बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on May 5, 2015 at 8:01pm

वाह! बहुत ही सुन्दर चित्रण किया है!अंतिम पंक्तियों ने आह निकाल दी! आपको हार्दिक बधाई व् शुभकामनाए!

Comment by Mohinder Kumar on May 5, 2015 at 3:06pm

जोर का झटका धीरे से.... कभी कभी हम किसी से आवश्यकता से अधिक आशायेँ जोड लेते हैँ एँव इस बाँध के टूटते ही सँजोया हुआ सब कुछ बाढ मेँ बह जाता है.... सार्थक प्रस्तुति 

Comment by Dr. Vijai Shanker on May 5, 2015 at 10:08am
आदरणीय सुश्री सीमा सिंह जी , आपकी प्रथम प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए बधाई, और आगे के लिए शुभकामनाएं , सादर।

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