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बैसाखी (लघुकथा)

"अरी भागवान  ! तुम इस तरह क्यूँ देख रही हो बेटे को ?"

" देख रही हूँ कहीं लडखडाया तो हम झट से सहारा दे देंगे ."

"क्या वाकई तुम्हे लगता है कि उसे तुम्हारे सहारे की जरूरत है ?"

 " शायद नहीं , बड़ा हो गया है  अब जीवन साथी भी  मिल गयी है ."

"हमने  अपना फ़र्ज़ पूरा किया ,अब उसे हमारे सहारे की जरूरत नहीं है .

 ,जीवन पथ पर चलना  सीखा दिया है हमने "

"पर अब हम असक्त हो गएँ हैं ,उसके प्यार की बैसाखी की जरूरत अब हमें है ."

@मौलिक व् अप्रकाशित 

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Comment by Rita Gupta on June 4, 2015 at 10:55pm

धन्यवाद महर्षि जी ,उम्र के हर दौर में सबको एक दुसरे की सहारे की बैसाखी की जरूरत पड़ती है .

Comment by Rita Gupta on June 4, 2015 at 10:53pm

आभार  और हार्दिक धन्यवाद शुभ्रांशु जी ,आपको भाव पसंद आये .

Comment by Rita Gupta on June 4, 2015 at 10:51pm

आदरणीय  सरस जी ,आपने  रचना के भाव को बखूबी महसूस किया ,धन्यवाद .

Comment by Shubhranshu Pandey on June 4, 2015 at 8:36pm

आदरणीया रीता जी, 

सुन्दर भाव से लिखी गयी कथा. 

सादर.

Comment by maharshi tripathi on June 3, 2015 at 5:27pm

उसके प्यार की बैसाखी की जरूरत अब हमें है ."

अति सुन्दर ,,हार्दिक बधाई आ.Rita Gupta जी |

Comment by saras darbari on June 3, 2015 at 10:16am

 " शायद नहीं , बड़ा हो गया है  अब जीवन साथी भी  मिल गयी है ."

"हमने  अपना फ़र्ज़ पूरा किया ,अब उसे हमारे सहारे की जरूरत नहीं है .

आखिर  माँ का  दिल जो ठहरा ...आश्वासन में भी एक कसक है...

वा कसक पाठक तक बखूबी पहुँच गयी ...बधाई  Rita Gupta जी 

Comment by Rita Gupta on June 2, 2015 at 6:27pm

आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी ,शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद .मैं कोशिश करुँगी कि अपनी शिल्पगत कमियों को दूर  कर सकूँ ,आपकी  मार्गदर्शन की आकांक्षी हूँ .  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 2, 2015 at 12:50pm

लघुकथा की अंतर्दशा जिस भाव के साथ बहना चाहती है वह शिल्पगत कमियों के कारण स्पष्टता नहीं पा सकी है.
प्रयास आशान्वित करता है. हार्दिक शुभकामनाएँ

Comment by Rita Gupta on June 1, 2015 at 10:37pm

लघु कथा को अपना वक़्त और प्यार देने हेतू  आभार राजेश कुमारी जी और श्रीमान सुधीर द्विवेदी जी 

Comment by Sudhir Dwivedi on June 1, 2015 at 10:08pm

जीवन की संझा में अपनों के प्यार की बैसाखी की जरूरत होती ही है 

सुंदर प्र्स्तुतित के लिए बधाई आदरणीया रीता जी सादर 

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