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नन्हा यश अंग्रेजी के शब्द जैसे गुड-बैड, स्माल-बिग ,ब्यूटीफुल-अग्ली(ugly) सीख रहा था .एक दिन स्कूल से आते ही उसने अंग्रेजी की पुस्तक निकाली और बोला

“माँ,ये देखो ये फोटो बिलकुल तुम्हारी जैसी है ,मैंने इसे ही ब्यूटीफुल लिखा तो टीचर ने गलत कर दिया .उन्होंने इस फ्रॉक वाली को ब्यूटीफुल बताया और इसे अग्ली,ऐसा क्यों? “

“बेटा,जिसे तुम मेरी जैसी समझ रहे हो वह तो सांवली है जबकि ये गोरी –चिट्टी है,इसलिए सुंदर वही हुई ना “

यश माँ को ध्यान से देखने लगा , रंग भेद की पहली कक्षा में उसकी प्रविष्टि हो चुकी थी .

 

( मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment by Rita Gupta on August 15, 2015 at 12:39am

आदरणीय Sulabh जी ,आपको कथा का मर्म पसंद आई ,आभारी हूँ .

Comment by Rita Gupta on August 15, 2015 at 12:38am

आदरणीय Santlal Karun जी आभार आपका .

Comment by Rita Gupta on August 15, 2015 at 12:37am

आदरणीय Maharishi Tripathi जी   आभार .

Comment by Sulabh Agnihotri on August 13, 2015 at 5:24pm

रंग भेद की पहली कक्षा में उसकी प्रविष्टि हो चुकी थी  - वाह ! इसे कहते हैं लघुकथा। कितनी मासूमियत से कितनी गहरी चोट ! फिर वाह !!!

Comment by Santlal Karun on July 24, 2015 at 6:36pm

आदरणीया रीता जी, सार्थक, सारगर्भित और सामयिक लघु कथा के लिए साधुवाद तथा महीने की श्रेष्ठ रचना के चयन पर बधाई !

Comment by maharshi tripathi on July 22, 2015 at 3:16pm

 रंग भेद की पहली कक्षा में उसकी प्रविष्टि हो चुकी थी .,,,,सब कुछ तो कह दिया इस पंक्ति ने ,,बहुत बढ़िया |

Comment by Rita Gupta on July 18, 2015 at 7:10pm

आदरणीय सचिन देव जी धन्यवाद .

Comment by Sachin Dev on July 17, 2015 at 3:22pm

आदरणीय रीता गुप्ता जी, एक बढ़िया सन्देश देती लघुकथा और माह की सर्वश्रेष्ठ रचना हेतु हार्दिक बधाई आपको ! 

Comment by Rita Gupta on July 16, 2015 at 10:59am

धन्यवाद लक्ष्मण रामानुज जी ,आपको ये रचना संदेशपरक लगी .आभार .

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 16, 2015 at 10:41am

भेद भाव और स्वार्थ जैसी बाते बच्चें सबसे अधिक घर में सीखते है | माता पिता की मानसिकता का असर बच्चों पर पड़ता ही है | अति सुंदर सन्देश देती लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया रीता गुप्ता जी 

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