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सड़क के बीचो –बीच नन्ही सी कोपल को पैर तले आते देख मनीष सिहर गया था .क्या करने जा रहा था .तपती धरा ,गर्म हवा ,पथरीली जमीन पर पसरा पिघला डामर,अंगुल बराबर हैसियत पर टक्कर इनसब से.सीना ताने उस हरीतिमा की जिजीविषा ने उसे हिम्मत से लबरेज कर दिया कि वह मजबूती से घर में सबसे बोल सके कि गर्भ में बेटी है तो क्या वह उसे पोषित करेगा .जिबह के लिए जाती बकरी सम उसकी पत्नी खिल गयी और कभी जुबान नहीं खोलने वाले बेटे के जुर्रत पर माता पिता थम गए .नेपथ्य में नन्हा अंकुर एक बड़े से फलदार पादप में परिवर्तित होता दिख रहा था .

(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by Rita Gupta on July 15, 2015 at 8:51pm

आदरणीय महिमा जी ,आभारी हूँ  आपकी जो आपने हौसला वर्धन किया .

Comment by MAHIMA SHREE on July 12, 2015 at 5:26pm

वाह....बहुत सुन्दर ... इस विषय पर हजारों कथाएं लिखी गई होगी..पर आपने बहुत ही खूबसूरती से इस विषय को संवार कर प्रस्तुत किया है ..बधाई आपको

Comment by Rita Gupta on July 5, 2015 at 9:14am

धन्यवाद आदरणीय गणेश बागी जी ,आपसे शाबाशी मिलना मुझे गौरान्वित कर गयी .

Comment by Rita Gupta on July 5, 2015 at 9:12am

धन्यवाद आदरणीय सौरभ पांडे जी ,यदि मैं ने भाव स्पष्ट व्यक्त किये हैं तो ये इस  मंच और आपलोगों के सानिद्ध्य को जाता है . 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 5, 2015 at 12:24am

स्पष्ट भाव को कितने सुन्दर बिम्ब मिले हैं ! वाह ! हार्दिक शुभकामाएँ, आदरणीया रीता जी.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 4, 2015 at 4:20pm

वाह वाह, बहुत ही सधी हुई शैली में लघुकथा के बहाने बड़ी बात कह गयीं आदरणीया रीता गुप्ता जी, बहुत बहुत बधाई.

Comment by Rita Gupta on June 17, 2015 at 10:49pm

डॉ Vijai Shanker जी धन्यवाद .

Comment by Rita Gupta on June 17, 2015 at 10:47pm

आदरणीय Vinaya Kumar जी आभार 

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 16, 2015 at 3:28pm

प्रेरक, बधाई, आदरणीय सुश्री रीता गुप्ता जी, सादर. 

Comment by विनय कुमार on June 16, 2015 at 2:32pm

अच्छी सकारात्मक लघुकथा , बेहतरीन शब्दावली , बधाई स्वीकारें आदरणीया रीता गुप्ता जी .

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