For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज फिर आँधियाँ उठीं दिल में
आज फिर नज़र , आप आये हैं !

खाक़ हो जाते ,ग़र नहीं मिलते
खत्म अब , गर्दिशों के साये हैं !

सोचते रहते जिनको शामो सहर,
ख्वाबों में भी , कब वो आये हैं !

खिल उठी है ये सारी कायनात,
मन ही मन जब वो मुस्कुराएं हैं!

शायद करेंगे ,आज वादे वफ़ा,
फिर से पहलू में आज आये हैं!

आज फिर आँधियाँ उठीं दिल में
आज फिर नज़र , आप आये हैं !!

मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 653

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विनय कुमार on June 4, 2015 at 12:04am

बहुत बहुत आभार आदरणीय महर्षि त्रिपाठीजी , कुछ नया ही हो गया .

Comment by maharshi tripathi on June 3, 2015 at 11:02pm

शायद करेंगे ,आज वादे वफ़ा, 
फिर से पहलू में आज आये हैं!

आज फिर आँधियाँ उठीं दिल में 
आज फिर नज़र , आप आये हैं !!,,,सुन्दर इस नयी विधा से मुझे भी लाभ मिलेगा ,,आपका आभार आ. vinaya kumar singh जी 

Comment by विनय कुमार on June 2, 2015 at 8:00pm

जी , गज़लनुमा कविता ही हो गयी है , बहुत बहुत आभार आदरणीय वीनस केसरी जी..

Comment by वीनस केसरी on June 2, 2015 at 7:44pm

सुन्दर प्रस्तुति

कुछ लोग इसे ही ग़ज़लनुमा भी कहते हैं ...

Comment by विनय कुमार on June 2, 2015 at 12:52pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी , आपके शब्द सम्बल प्रदान करते हैं हम जैसे नए लेखकों को | 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 2, 2015 at 12:45pm

कविता की अंतर्दशा हालाँकि गजलियाती हुई लगी..

आपके प्रयासों पर शुभकामनाएँ ..

Comment by विनय कुमार on June 1, 2015 at 1:14pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, पहली मर्तबा कोशिश की है इस विधा में कुछ लिखने की इस मंच पर | आप ने सराहा , मनोबल बढ़ गया मेरा..

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 1, 2015 at 12:22pm

गजलाने अंदाज की कविता भी क्या खूब हुयी है सर ! हैट्स आफ .

Comment by विनय कुमार on May 31, 2015 at 2:56pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी ..

Comment by मनोज अहसास on May 31, 2015 at 2:44pm
मै आपको बधाई देता हूँ
सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
4 seconds ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
2 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
6 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
21 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service