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आज फिर आँधियाँ उठीं दिल में
आज फिर नज़र , आप आये हैं !

खाक़ हो जाते ,ग़र नहीं मिलते
खत्म अब , गर्दिशों के साये हैं !

सोचते रहते जिनको शामो सहर,
ख्वाबों में भी , कब वो आये हैं !

खिल उठी है ये सारी कायनात,
मन ही मन जब वो मुस्कुराएं हैं!

शायद करेंगे ,आज वादे वफ़ा,
फिर से पहलू में आज आये हैं!

आज फिर आँधियाँ उठीं दिल में
आज फिर नज़र , आप आये हैं !!

मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on June 4, 2015 at 12:04am

बहुत बहुत आभार आदरणीय महर्षि त्रिपाठीजी , कुछ नया ही हो गया .

Comment by maharshi tripathi on June 3, 2015 at 11:02pm

शायद करेंगे ,आज वादे वफ़ा, 
फिर से पहलू में आज आये हैं!

आज फिर आँधियाँ उठीं दिल में 
आज फिर नज़र , आप आये हैं !!,,,सुन्दर इस नयी विधा से मुझे भी लाभ मिलेगा ,,आपका आभार आ. vinaya kumar singh जी 

Comment by विनय कुमार on June 2, 2015 at 8:00pm

जी , गज़लनुमा कविता ही हो गयी है , बहुत बहुत आभार आदरणीय वीनस केसरी जी..

Comment by वीनस केसरी on June 2, 2015 at 7:44pm

सुन्दर प्रस्तुति

कुछ लोग इसे ही ग़ज़लनुमा भी कहते हैं ...

Comment by विनय कुमार on June 2, 2015 at 12:52pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी , आपके शब्द सम्बल प्रदान करते हैं हम जैसे नए लेखकों को | 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 2, 2015 at 12:45pm

कविता की अंतर्दशा हालाँकि गजलियाती हुई लगी..

आपके प्रयासों पर शुभकामनाएँ ..

Comment by विनय कुमार on June 1, 2015 at 1:14pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, पहली मर्तबा कोशिश की है इस विधा में कुछ लिखने की इस मंच पर | आप ने सराहा , मनोबल बढ़ गया मेरा..

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 1, 2015 at 12:22pm

गजलाने अंदाज की कविता भी क्या खूब हुयी है सर ! हैट्स आफ .

Comment by विनय कुमार on May 31, 2015 at 2:56pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी ..

Comment by मनोज अहसास on May 31, 2015 at 2:44pm
मै आपको बधाई देता हूँ
सादर

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