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ग़ज़ल -- मेहनत से कमाता हूँ मैं ...

२२१-१२२१-१२२१-१२२

तलवार से तीरों से न ख़ंज़र से लड़ा हूँ
ख़ुद अपनी अना ही के मुक़ाबिल मैं खड़ा हूँ

मेहमान नवाज़ी मैं दिलो जान से करता
दौलत तो नहीं पास मेरे, दिल का बड़ा हूँ

मेहनत से कमाता हूँ मैं हर अपना निवाला
ईमाँ की कसौटी पे मैं कुन्दन का कड़ा हूँ

घर के लिए राशन लूँ या बच्चों की किताबें
मँहगाई के इस दौर में, मुश्किल में पड़ा हूँ

कहते हैं मुझे लोग मुहब्बत का मसीहा
दुनिया से मैं नफ़रत को मिटाने पे अड़ा हूँ

ये वक़्त बताएगा मैं पत्थर हूँ या हीरा
फ़िलहाल किसी भी न अँगूठी में जड़ा हूँ

नेताओं ने खाए हैं शहीदों के क़फन भी
भारत हूँ मैं और शर्म से धरती में गड़ा हूँ

शोहरत की बुलन्दी पे भी जा कर नहीं भूला
मिट्टी में मिलूंगा ही मैं, मिट्टी का घड़ा हूँ

मौलिक व अप्रकाशित

एक मजाकिया भी :)
कूचे की सभी लड़कियां हैं मेरी दीवानी
लेकिन मैं हनुमान का हूँ भक्त, छड़ा हूँ

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Comment

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Comment by दिनेश कुमार on June 3, 2015 at 6:57pm
हौसला अफ़्ज़ाई के लिए बहुत शुक्रिया आदरणीय कबीर साहब .
टंकण त्रुटि ठीक कर दी है सर.
Comment by दिनेश कुमार on June 3, 2015 at 6:54pm
शुक्रिया आ.विनय कुमार सिंह जी .
Comment by Samar kabeer on June 3, 2015 at 2:44pm
जनाब दिनेश कुमार जी,आदाब,वाह वाह वाह ,ख़ूबसूरत ,कामयाब,शानदार ग़ज़ल के लिये शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।

"मँहगाई का इस दौर में, मुश्किल में पड़ा हूँ"

इस मिसरे में शायद टंकण त्रुटि है ,ये मिसरा इस तरह होना चाहिये :-

"मँहगाई के इस दौर में, मुश्किल में पड़ा हूँ"
Comment by विनय कुमार on June 3, 2015 at 12:41pm

//नेताओं ने खाए हैं शहीदों के क़फन भी
भारत हूँ मैं और शर्म से धरती में गड़ा हूँ// , वाह वाह , बहुत उम्दा | बधाई आदरणीय.

Comment by दिनेश कुमार on June 3, 2015 at 11:18am
हौसला अफ़्जाई के लिए बहुत शुक्रिया आ.निलेश भाई जी।
गलतियों में सुधार के लिए आभारी हूँ। ठीक करता हूँ।
Comment by दिनेश कुमार on June 3, 2015 at 11:17am
शुक्रिया आ.मोहन जी।
Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 3, 2015 at 11:10am

बहुत ख़ूब... हर शेर बहुत अच्छा कहा है ...
मेहमान नवाज़ी में दिलो ज़ान है हाज़िर 
दौलत तो नहीं पास मेरे, दिल का बड़ा हूँ..
.
मतले के सानी मिसरे में तो भर्ती का है 
ख़ुद अपनी अना ही के मुक़ाबिल मैं खड़ा हूँ..

मात्र सुझाव हैं ..
सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on June 3, 2015 at 10:43am

जनाब बढ़िया शेर हैं ...मगर कूचे की लड़किओं से बात तो कर लीजिये क्या ख़बर छड़ा ना रहना पड़े ......सादर 

कृपया ध्यान दे...

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