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नन्हा यश अंग्रेजी के शब्द जैसे गुड-बैड, स्माल-बिग ,ब्यूटीफुल-अग्ली(ugly) सीख रहा था .एक दिन स्कूल से आते ही उसने अंग्रेजी की पुस्तक निकाली और बोला

“माँ,ये देखो ये फोटो बिलकुल तुम्हारी जैसी है ,मैंने इसे ही ब्यूटीफुल लिखा तो टीचर ने गलत कर दिया .उन्होंने इस फ्रॉक वाली को ब्यूटीफुल बताया और इसे अग्ली,ऐसा क्यों? “

“बेटा,जिसे तुम मेरी जैसी समझ रहे हो वह तो सांवली है जबकि ये गोरी –चिट्टी है,इसलिए सुंदर वही हुई ना “

यश माँ को ध्यान से देखने लगा , रंग भेद की पहली कक्षा में उसकी प्रविष्टि हो चुकी थी .

 

( मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment by Aditya Kumar on June 12, 2015 at 8:11pm

वास्तव में यह एक लघु " कथा" है। समाज को आइना दिखा रही है। बहुत सही है। सर्वोत्तम है अपने क्षेत्र में। बधाई एवं धन्यवाद।
अपने अन्य फेसबुक पर साझा कर रहा हूँ.

Comment by Rita Gupta on June 12, 2015 at 5:11pm

धन्यवाद विनय जी ,आभार 

Comment by Rita Gupta on June 12, 2015 at 5:11pm

धन्यवाद ,डा गोपाल नारायण जी 

Comment by विनय कुमार on June 11, 2015 at 2:51pm

बहुत प्यारी लघुकथा // रंग भेद की पहली कक्षा में उसकी प्रविष्टि हो चुकी थी // ,जबरदस्त है | बहुत बहुत बधाई आदरणीया रीता गुप्ता जी..

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 11, 2015 at 2:32pm

बेहतरीन , अति सुन्दर .

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