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"चलो पापा, आज मैँ आप को शाम की सैर करवा लाती हूँ।" नन्ही तनु की बात सुनकर कई दिन से बिस्तर पर पड़े बीमार राज के चेहरे पर मुस्कान आ गयी।
दूर अस्त होते सूर्य की बिखरती लालिमा और शांत सुहानी शाम के साथ, बेटी के चेहरे पर बड़ो जैसा विश्वास राज को बहुत भला लग रहा था। अनायास तनु उसे लगभग खींचते हुये एक जगह ले गयी और अपनी प्यारी आवाज में बोली। "पापा पापा देखो, यही पर छोड़ गयी थी ना मुझको एक 'ऐंजल'! 'ममा' ने बताया है मुझे।"
और अचानक ही अतीत को याद कर राज की आँखे भीग गयी। "क्या हुआ पापा?" नन्ही तनु ने प्रश्न किया। "कुछ नही बेटी।" कहते हुये राज ने आँसु पोछ लिये। "क्या बताये उसे, समय आने पर जान ही जायेगी कि 'रियल ऐंजल' तो वह खुद है जो हम नि:संतान पति पत्नि के जीवन में बहार बनकर आयी थी। उसको छोड़ कर जाने वाली तो...........।"
बेटी के हाथ को मजबूती से थामे राज घर की ओर लौटने लगा, दूर कही दिन ढलने लगा था।

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'विरेन्दर वीर मेहता' (मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 13, 2015 at 9:20am

वीरेन्द्र जी

बेहतरीन कथा . आख़िरी वाक्य न भी होता तो भी कथा पूर्ण होती .

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on July 12, 2015 at 9:43pm
आदरणीय मिथिलेश कुमार जी
कथा पर आपके शब्द आपकी प्रतिक्रिया सदा ही मेरा हौसला बढ़ाती रही है आपके इस स्नेह के लिये मैं दिल से आभारी हूँ। ( आपका ये कथन कि आखिरी में दिखाये ...... डाॅटस में एक और कथा छुपी है, एक दम सही है और उस कथा को लाना भी तय है देर सवेर ही सही।)
Comment by VIRENDER VEER MEHTA on July 12, 2015 at 9:36pm
आदरणीय विनय कुमार जी कथा पर आपकी प्रोत्साहन देती प्रतिक्रिया के लिये दिल से आभार।
Comment by VIRENDER VEER MEHTA on July 12, 2015 at 9:35pm
आदरणीय प्रदीप कुमार जी कथा पर आपके हौसला देते शब्दो के लिये तहे दिल से आभार।
Comment by विनय कुमार on July 12, 2015 at 12:57am

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण लघुकथा आदरणीय वीर मेहता जी । एंजेल तो वो लोग भी होते हैं जो ऐसे बच्चों को अपना लेते हैं और उनको माँ बाप की कमी महसूस नहीं करने देते । बधाई इस लघुकथा के लिए ..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 12, 2015 at 12:20am

आदरणीय वीरेंदर जी बहुत ही मार्मिक और दिल को छू लेने वाली लघुकथा हुई है. इस शानदार और सफल लघुकथा हेतु हार्दिक बधाई 

//उसको छोड़ कर जाने वाली तो...........// के ........ डॉट्स में एक और बड़ी कथा छुपी हुई है ...

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on July 11, 2015 at 11:34am

बहुत ही बेहतर कथा , जितनी भी बधाई दी जाए कम है . 

सादर बधाई. आदरणीय मेहता जी 

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