For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शहर की रूमानियत जाने कहाँ पर खो गयी

शहर की रूमानियत, जाने कहाँ पर खो गयी

एक चिंगारी से गुलशन, खाक जलकर हो गयी

अजनबी से लग रहे हैं, जो कभी थे मित्रवत

रूह की रूमानियत, झटके में कैसे सो गयी

ख्याल रखना घर का मेरा, जा रहे हैं छोड़कर

सुन के उनकी बात जैसे, आत्मा भी रो गयी

सड़क सूनी, सूनी गलियां, बजते रहे थे सायरन

थे मुकम्मल कल तलक सब, आज ये क्या हो गयी

रब हैं सबके बन्दे उनके, एक होकर अब रहो

इस धरा को पाक रक्खो, साख सबकी खो गयी 

(मौलिक व अप्रकाशित) 

- जवाहर लाल सिंह 

Views: 467

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 24, 2015 at 6:42pm

आदरणीय सुशील सिंह जी, सादर अभिवादन ...मेरी भावना को सम्मान देने के लिए आपका ह्रदय से आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 24, 2015 at 6:41pm

आदरणीया कांता जी, सादर अभिवादन! आपने मेरी अभिव्यक्ति को समझा, सराहा, मान दिया इसके लिए मैं आपका शुक्रगुजार हूँ ...शिल्पगत त्रुटियाँ हो सकती हैं, जिनमे मैं अभी सीखने के दौर में हूँ, पर भावनाएं व्यक्त कर पाया हूँ इसका मुझे संतोष है ..सादर!

Comment by Sushil Sarna on July 24, 2015 at 3:25pm

ख्याल रखना घर का मेरा, जा रहे हैं छोड़कर
सुन के उनकी बात जैसे, आत्मा भी रो गयी

वाह बहुत ही सुंन्दर भाव बन पड़े हैं आदरणीय जवाहर जी … इस गहन अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by kanta roy on July 24, 2015 at 11:32am
बेहद भावपूर्ण प्रस्तुति है यह आपकी । शहर की रूमानियत जाने कहाँ खो गई.......
अजनबी से लग रहे हैं, जो कभी थे मित्रवत
रूह की रूमानियत, झटके में कैसे सो गयी........ बडी बातों में ही कई बात आप ऐसे कह गये ... जाने कितने गये गुजरे जमाने खो गये । स्वार्थ के पैरों तले रौंदे गये सब रौनके .......बधाई आपको आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
11 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
14 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
Tuesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
Tuesday
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
Tuesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय  अखिलेश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सहमत एवं संशोधित "
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय सुशीलजी हार्दिक बधाई। लगातार बढ़िया दोहा सप्तक लिख रहें हैं। घूस खोरी ....... यह …"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Mar 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service