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मेरी चिंता मत न कर तू दिल की चिंता जारी रख

2222 2222 2222 222

मेरी चिंता मत न कर तू दिल की चिंता जारी रख,
कितने बलवे झेले तूने, यारों से अब यारी रख ।

उसके ज़ुल्मों से तंग आकर मर्यादा न भूलो तुम,
कर्मों का सब लेखा है ये अपना मन न भारी रख ।

जब देखो वो सरहद पर, बारूदी खेलों में मशगूल,
ताँका-झांकी बंद न होगी अपनी भी तैयारी रख ।

कब तक बिजली गर्जन कर तू बादल पर मंडरायेगी,
पापी तुझको भूलें हैं सब, अपनी भागीदारी रख ।

मैखाने में गिर कर उठना पीने वालों का दस्तूर,
गिर न पाये नज़रों से तू, इतनी तो खुद्दारी रख ।

हर्ष महाजन

"मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 878

Comment

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Comment by Harash Mahajan on August 23, 2015 at 1:31pm
आदरणीय डॉ.कंवर करतार जी आपके उत्साहवर्धक शब्दों के लिए मैं ह्रदय तल से आभारी हूँ । बहुत बहुत शुक्रिया । साभार ।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 23, 2015 at 11:17am

मतले के उला में मत और न दोनों का आना चाकित करता है  यदि यह टाइप त्रुटि है तब ठीक है , गजल पुरअसर है.

Comment by कंवर करतार on August 22, 2015 at 10:43pm

हर्ष जी ,सुंदर ग़जल के लिए बहुत बहुत बधाई 

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