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ग़ज़ल :- महल के सामने मिट्टी का घर अच्छा नहीं लगता

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन

सभी कहते हैं मुझको भी 'समर' अच्छा नहीं लगता
महल के सामने मिट्टी का घर अच्छा नहीं लगता

ख़ुदा का दीन सबको अम्न का पैग़ाम देता है
हो बे अमनी ख़ुदा के नाम पर अच्छा नहीं लगता

जो हैं नादान वो इसके लिये लड़ते हैं आपस में
जो दाना हैं उन्हें ये माल-ओ-ज़र अच्छा नहीं लगता

मेरी इस बात की यारों दलील-ए-मुस्तनद ये है
वो मेरे साथ क्यों होते अगर अच्छा नहीं लगता

शरारत और शौख़ी ही भली मालूम होती है
किसी भी फूल के चहरे पे डर अच्छा नहीं लगता

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by shree suneel on August 30, 2015 at 10:53am
ख़ुदा का दीन सबको अम्न का पैग़ाम देता है
हो बे अमनी ख़ुदा के नाम पर अच्छा नहीं लगता.. सही बात!
सारे अशआर हीं ख़ूबसूरत, उम्दा कहें हैं आपने आदरणीय.
बहुत बहुत बधाई आपको. सादर.
Comment by Samar kabeer on August 29, 2015 at 11:22pm
जनाब गुमनाम जी,आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on August 29, 2015 at 11:21pm
जनाब मनोज कुमार जी,आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on August 29, 2015 at 11:20pm
जनाब पंकज कुमार जी,आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on August 29, 2015 at 11:20pm
जनाब धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी,आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on August 29, 2015 at 11:19pm
जनाब राहुल डांगी जी,आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on August 29, 2015 at 11:18pm
जनाब रवि शुक्ल जी,आदाब,सुब्ह से रात तक रू बरु फ़ोन और whatsapp पर इस्लाह-ए-सुख़न का काम करता हूँ,इसका यह मतलब नहीं है कि मैं कोई उस्ताद हूँ,सिर्फ़ इतना है कि जो कुछ भी मुझे आता है उसे दूसरों में तक़सीम करके मुझे ख़ुशी हासिल होती है ,आपकी ख़्वाहिश के एहतिराम में जल्द ही अपनी तस्वीर डाल दूँगा,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on August 29, 2015 at 11:09pm
जनाब हर्ष महाजन जी,आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on August 29, 2015 at 11:07pm
मोहतरमा कांता रॉय जी,आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on August 29, 2015 at 11:05pm
जनाब मिथिलेश वामनकर जी,आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

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