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“आप को अपनी पत्नी की आत्महत्या के लिए गिरफ्तार किया जाता है.”

“इंस्पेक्टर साहब ! मेरी बात सुनिए. मैं बेकसूर है. वह मुझ से इजाजत ले कर अपने पूर्व प्रेमी यानि पति के पास गई थी.”

“मैं कुछ नहीं जानता. वह अपने ‘सुसाइड नोट’ में लिख कर गई है कि मैं अपने पति के धोखे की वजह से आत्महत्या कर रही हूँ. इसलिए अब जो कुछ कहना है कोर्ट में कहना.” कह कर इंस्पेक्टर ने हाथ में हथकड़ी लगा दी.

यह देख पति की आँखों के सामने अँधेरा छा गया, “ वाह ! तू मुझ से इजाजत ले कर अपने हिस्से का उजाला ढ़ूंढ़ने गई थी और तूने अपने साथ साथ मेरी जिन्दगी में भी अँधेरा कर दिया.” कहते ही वह चीख उठा.

                                      ------------------

(मौलिक व अप्रकाशित )

०२/०९/२०१५  

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Comment by Omprakash Kshatriya on September 2, 2015 at 9:22pm

लघुकथा- अँधा

“ ओह  ! तू मुझ से इजाजत ले कर अपने हिस्से का उजाला ढ़ूंढ़ने गई थी और तू ने अपने जिन्दगी को अँधेरे में गुम कर लिया.” पति सदमें में था.

“ आप को अपनी पत्नी की आत्महत्या के लिए गिरफ्तार किया जाता है.”

“ मुझे क्यों गिरफ्तार करेंगे इंस्पेक्टर साहब ? मैं बेकसूर है. वह मुझ से इजाजत ले कर अपने पूर्व प्रेमी यानि पति के पास गई थी. उसे गिरफ्तार कीजिए .”

“ मैं कुछ नहीं जानता. वह अपने ‘सुसाइड नोट’ में लिख कर गई है कि मैं अपने पति के धोखे की वजह से आत्महत्या कर रही हूँ. इसलिए अब जो कुछ कहना है कोर्ट में कहना.” कह कर इंस्पेक्टर ने हाथ में हथकड़ी लगा दी. 

Comment by Omprakash Kshatriya on September 2, 2015 at 9:21pm

आ सुशिल शर्मा जी आप को लघुकथा पसंद आई. मेरी मेहनत सफल हो गई.  आभार आप को .

Comment by Sushil Sarna on September 2, 2015 at 6:44pm

लघु कथा अपने लक्ष्य में सफल बनी है। स्त्री ने पुरुष की विशालता को बौना कर दिया। हार्दिक बधाई आदरणीय। 

Comment by Omprakash Kshatriya on September 2, 2015 at 1:11pm
आ तेज वीर सिंह जी आप ने लघुकथा के समस्त भावों को अपने शब्दों में व्यक्त कर लघुकथा कासमर्थन किया है उस के लिए आप का बहुतबहत शुक्रिया ।
Comment by Omprakash Kshatriya on September 2, 2015 at 1:04pm
आ श्याम नारायण जी आप को लघुकथा अच्छी लगी । इस अनुमोदन हेतु आभार आप का ।
Comment by TEJ VEER SINGH on September 2, 2015 at 11:35am

हार्दिक बधाई आदरणीय ओमप्रकाश क्षत्रिय जी, बहुत शानदार लघुकथा बनी है!त्रिया चरित्रम पुरुषस्य भाग्यम,कहावत चरितार्थ हो गयी!

Comment by Shyam Narain Verma on September 2, 2015 at 10:29am

सुन्दर लघु कथा के लिये बधाई ।

सादर 

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