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बैठा है, किसी नय़ी हलचल का इंतजार है

बैठा है, किसी नई हलचल का इंतजार है,
खुदगर्ज दिल को आज फ़िर किसी से प्यार है

पुरानी उलफ़तों की दुहाई अब नही देता,
खुमारी है नई, पर खौफ़ तो बरकरार है

हर ज़ख्म को वक्त ने कर दिया है बख्तरबंद,
कुछ दर्द के निशान आज भी यादगार है

परख लें कंही नकली न हो पैमानें का नशा
पोशीदा बातों का कोई और भी राज़दार है

गर ये फ़तह है, तो फ़रियाद न कर 'अमि'
हालात के अंजुमन में तू फ़िर से गुनहगार है

 

-अमि'अज़ीम'

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Comment by अमि तेष on April 15, 2011 at 11:16am
Dhanybaad veerevdra sir...
Comment by Veerendra Jain on April 15, 2011 at 12:16am
waah Amitesh ji...bahut hi sunder... bahut badhai aapko is kriti per...
Comment by अमि तेष on April 14, 2011 at 11:17pm
jee Ganesh sir.....
Dhanybaad..

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 14, 2011 at 5:51pm
परख लें कंही नकली न हो पैमानें का नशा
पोशीदा बातों का कोई और भी राज़दार है,


वाह वाह साहब, बातों बातों में बहुत ही गूढ़ बात कह दी आपने , सभी शे'र अच्छे लगे , दाद कुबूल करे |


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