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" झूठ - लघुकथा "
"देख सुधा लौट आई मेरी बिन्नो।" कहते हुए माँ ने अपनी नवजात पोती को उसकी उसकी गोद में डाल दिया।
"हाँ माँ ये तो सच में पूरी बिन्नो मौसी है।" माँ की ख़ुशी में शामिल होते हुए सुधा ने मुस्करा कर अपनी भाभी सुमन की ओर देखा मानो पूछ रही हो। "बात बनी कि नहीं!"
भाभी को, ख़ुशी से झूमती माँ को एक टक देख अनायास ही उसके सामने भाभी का परेशान चेहरा अतीत में झलकने लगा। "जीजी मेरी समझ में नहीं आ रहा कि मैं माँजी को कैसे ये 'रिपोर्ट' दिखाऊं। वो पहले ही सिर्फ 'पोते' की जिद पर अड़ी है और पोता ना होंने पर ..... ।"
घर में माँ के दबदबे को सुधा अच्छी तरह जानती थी, लेकिन कुछ तो करना ही था आने वाली नवजात को बचाने के लिए।
"सुधा बेटी!" माँ की आवाज से वो वर्तमान में लौट आई। "अगर तूने मुझे अपने 'सपने' के बारे में नहीं बताया होता कि मेरी बिन्नो ही बहु के आँगन में आने वाली है तो मैं तो.....।" सुधा माँ के मुँह पर हाथ रखते हुए मुस्कराकर उनके गले लग गयी और सोचने लगी माँ तुमने ही कहा था न कि अच्छे काम के लिए बोला गया झूठ, झूठ नहीं होता इसीलिए मुझे तुमसे तुम्हारी सबसे प्यारी छोटी बहन के वापिस आने का झूट बोलना पड़ा।
(मौलिक और अप्रकाशित)
'विरेंदर वीर मेहता'

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Comment by Abid ali mansoori on November 4, 2015 at 8:26pm

सार्थक रचना के लिए वधाई स्वीकारें आदरणीय वीर मिहता जी!

Comment by TEJ VEER SINGH on November 4, 2015 at 4:59pm

हार्दिक बधाई आदरणीय वीर मेहता जी!अच्छी लघुकथा!

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 4, 2015 at 12:38pm
बहुत खूब आदरणीय वीरेन्द्र वीर मेहता जी। मैं पिछली सभी टिप्पणियों से सहमत होते हुए आपकी इस बढ़िया प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत हार्दिक मुबारकबाद प्रेषित करता हूँ।
Comment by Rahila on November 4, 2015 at 12:51am
बेटियों को बेटियों से डर है । कमाल की दुर्भाग्य है । हम बेटी बचाओ आंदोलन चला रहे है, एक बेटी को दूसरी बेटी से बचा रहे है । बहुत बेहतरीन रचना आदरणीय । बहुत बधाई ।
Comment by VIRENDER VEER MEHTA on November 3, 2015 at 11:43pm
सादर भाई मिथिलेश वामनकर जी आप के स्नेहशील शब्दों और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से आभार।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on November 3, 2015 at 5:24pm

आदरणीय वीरेंदर जी आपकी प्रस्तुति ने झिंझोड़ दिया बिलकुल. अत्यंत प्रभावकारी और अपने मर्म को अभिव्यक्त करने में सफल लघुकथा. आपको  बहुत बहुत बधाई 

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