For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कैसे अपने मधु पलों को .... (१००वी रचना )

कैसे अपने मधु पलों को शूल शैय्या पे छोड़   आऊँ
स्मृति घटों पर विरहपाश के कैसे बंधन तोड़ आऊं

विगत पलों के अवगुंठन में
इक दीप अधूरा जलता रहा
अधरों पर   लज्जा शेष रही
नैनों में स्वप्न मचलता रहा

एकांत पलों में तृप्ति भाव को किस आँगन मैं छोड़ आऊँ
प्रिय स्मृति घटों पर विरहपाश के कैसे बंधन तोड़ आऊँ

अधरों से मिलना अधरों का
तिमिर का मौन शृंगार हुआ
तृषित देह का देह मिलन से
अंगार पलों  का संचार हुआ

किस पल को मैं बना के जुगनू तिमिर देश में छोड़ आऊँ
प्रिय  स्मृति घटों पर विरहपाश के कैसे बंधन तोड़ आऊँ

वज्र क्षणों की मृदु रज कण से
अलंकृत सुधियों की श्वास हुई
अभिषेक पीर का हुआ नीर से
कम्पित उर की  हर आस हुई

लोचन के मैं अश्रु कलश को किस मेघ देश में छोड़ आऊँ
प्रिय स्मृति घटों पर विरहपाश के कैसे बंधन  तोड़ आऊँ

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 975

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on December 8, 2015 at 12:26pm

आ०  लक्ष्मण रामानुज लडीवाला  जी रचना की प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय  प्रशंसा  का दिल से आभार। 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on December 8, 2015 at 11:28am

शतकीय  रचना पर  बधाई श्री सुशिल  सरना  जी  | भावपूर्ण रचना  के लिए  बधाई 

Comment by Sushil Sarna on December 5, 2015 at 6:30pm

आदरणीय कांता रॉय  जी रचना में निहित अहसासों को  आपने इतना मान दिया इसके लिए मैं आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। 

Comment by kanta roy on December 4, 2015 at 5:26pm

लोचन के मैं अश्रु कलश को किस मेघ देश में छोड़ आऊँ
प्रिय स्मृति घटों पर विरहपाश के कैसे बंधन तोड़ आऊँ------अदभुत ,सम्मोहित करती हुई पंक्तियाँ। बेहतरीन रचना है ये आपकी। बधाई कबील कीजिये आदरणीय सुशील सरना जी।

Comment by Sushil Sarna on December 2, 2015 at 9:31pm

आदरणीय Nita Kasar  जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का हृदयतल की गहराईयों से हार्दिक आभार।

Comment by Nita Kasar on December 2, 2015 at 6:59pm
सबसे पहिले शतकीय रचना के लिये हार्दिक बधाईयां आद०सुशील सरना जी ।सुंदर रचना प्रस्तुति पर पुन:बधाई आपको ।
Comment by Sushil Sarna on November 16, 2015 at 3:30pm

आदरणीया कल्पना जी रचना पर अपने शब्दों की स्नेह बरखा का तहे दिल से शुक्रिया।
.

Comment by Sushil Sarna on November 14, 2015 at 7:20pm

आ०  vijay nikore  जी रचना की प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय  प्रशंसा  का दिल से आभार। 

Comment by vijay nikore on November 12, 2015 at 3:46pm

बहुत ही सुन्दर रचना है। बधाई।

Comment by Sushil Sarna on November 8, 2015 at 12:42pm

आदरणीय  Dr.Prachi Singh जी रचना ने आपको प्रभावित किया ,मेरे लिए गर्व की बात है। आपकी हृदयग्राही प्रशंसा एवं गेयता बाबत सुझाव का दिल से हार्दिक आभार। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
22 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service