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वक्त बनके आ गये हो टल जाओगे

2122 2122 2222
वक्त बनके आ गये हो टल जाओगे
गर्दिशें कर तो अभी ही ढल जाओगे।
बुझ रहे दीये अभी रोशन जो रफ्ता
रोशनी बख्शो नजर में पल जाओगे।
हम बिठा लेते नयन में भूलें सब कुछ
कर भला वरना नजर से चल जाओगे।
आग उर में ले चले तो रौशन कर मग
बेवजह बाँटो तपिश मत जल जाओगे।
छल गये हो बार कितनी पूछो खुद से
सच न हो एक बार फिर अब छल जाओगे।

.
मौलिक व अप्रकाशित@

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Comment by Manan Kumar singh on December 3, 2015 at 9:02am
आदरणीय भाई समर कबीरजी,हौसला आफजाई के लिए आपका शुक्रिया
Comment by Samar kabeer on December 1, 2015 at 10:42pm
जनाब मनन कुमार सिंह जी,आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही है आपने,बधाई स्वीकार करें ।

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