For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दबे कुचले हुए लोगो! तुम्हें अब तक भरोसा है? -- इमरान खान

हुकूमत तुम ग़रीबों के सरों पर हाथ रक्खेगी,

दबे कुचले हुए लोगो! तुम्हें अब तक भरोसा है?

सियासत अपने मंसूबों में तुमको साथ रक्खेगी,

मसाइल से घिरे लोगो! तुम्हें अब तक भरोसा है?

तुम्हारी आंख से निकले हुए आंसू को वो देखें?

तुम्हारी सिसकियाँ देखें या फॉरेन टूर को देखें?

तुम्हारी फस्ल ना आने के मातम को मनायेगें,

या जाकर वेस्ट कंट्री से वो एफडीआई लायेंगे?

मिटाना चाहते हैं वो दुकानों को बाज़ारों से,

कोई मतलब नहीं उनको ग़रीबों से लाचारों से.

कभी वो ‘बीटी कॉटन’ और कभी वो ‘गेट’ लाते हैं,

तुम्हें ही ढेर करने के वो मनसूबे बनाते हैं.

फलों से सब्जियों से अपने मल्टी स्टोर भर लेना,

वो चाहते हैं तुम्हारी खेतियां मकबूज़ा कर लेना.

तुम्हारे जंगल उनकी आंख में काँटा सा चुभते हैं,

इन्हें कटवा के वो अपनी सिटी स्मार्ट चाहते हैं.

उन्हें बस मॉल बिल्डिंग और मल्टीप्लेक्स प्यारे हैं,

तुम्हारे झोंपड़े उनकी प्लानिंग को बिगाड़े हैं.

तुम्हें पगलो पता भी है ज़माने की परेशानी,

समिट मैं बैठकर चर्चा हुई मौसम बदलने की.

हुई मौसम में तब्दीली जो वो तुमने कराई है,

वो कहते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग तुमने बढाई है.

ग़रीबो! तुम घरों के चूल्हों से धुआं उड़ाते हो,

किसानो! तुम पे भी इलज़ाम है पूले जलाते हो.

और उन इलज़ाम देने वालों के हमी हैं जो उन पर,

अरे हद से भले लोगो! तुम्हें अब तक भरोसा है?

(मौलिक और अप्रकाशित)

Views: 536

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 17, 2015 at 12:58am

शासन और सत्ता किस तरीके आमजन की सोच और आकांक्षाओं से दूर है यह किसी एक देश की बात नहीं है. आपकी इस नज़्म में इसी भाव को खूबसूरती से शब्दों में पिराया गया है. आपकी जागरुकता को साझा करते इस नज़्म के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएँ और हार्दिक बधाइयाँ, इमरान भाई. 

Comment by इमरान खान on December 6, 2015 at 1:08am

गिरिराज जी गज़ल आपको पसंद आई मेरे लिए खुशी का मुकाम है, बेहद शुक्रिया।

Comment by इमरान खान on December 6, 2015 at 1:07am

कांता जी आपकी हौसला अफज़ाई का दिल से शुक्रिया

Comment by इमरान खान on December 6, 2015 at 1:06am

पसंद करने के लिए शुक्रिया दिग्‍विजय साहब

नज्‍़म उर्दू में कविता को कहते हैं। इसमें मतले, मकते वगैरह की पाबंदी नहीं होती। अक्‍सर एक ही ख्‍याल का गहराई से नज्‍म में शायर बयान करता है। गजल की तरह नज्‍म में हर शेर का आजाद तरीके से मुकम्‍मल होना जरूरी नहीं होता और एक शेर के बाद दूसरे शेर से भी मफहूम जुड़ा हो सकता है।  

Comment by इमरान खान on December 6, 2015 at 12:58am

इज्‍़ज़त अफज़ाई के लिए शुक्रिया लक्ष्‍मण धामी साहब। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 5, 2015 at 7:58pm

आदरणीय इमरान भाई , इस मार्मिक नज़्म के लिये आपको दिली बधाइयाँ ।

Comment by kanta roy on December 4, 2015 at 8:32pm

तुम्हारे जंगल उनकी आंख में काँटा सा चुभते हैं,
इन्हें कटवा के वो अपनी सिटी स्मार्ट चाहते हैं.------ क्या बात है ! क्या बात है ! हर अशआर को पढ़ने पर जुबान पर बस एक ही बात है , वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह !!!!!!!
बधाई आदरणीय इमरान खान जी।

Comment by DIGVIJAY on December 4, 2015 at 2:49pm

सर अगर नज्म कि शिल्प के बारे में थोड़ी जानकारी साझा करें तो मजा आ जाए । वैसे आपकी नज्म दिल को छू गयी, जनाब । सादर 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 4, 2015 at 11:46am

आ० इमरान भाई इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई l

Comment by इमरान खान on December 3, 2015 at 11:55pm
बहुत बहुत शुक्रिया समर कबीर साहब.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"आ. समर सर एवं मंच के सुधि पाठक गण!.मतले में बहुत विचार के बाद तरमीम की है ..अब मतला यूँ पढ़ा…"
6 minutes ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझिये (123)

( 221 1221 1221 122 )फ़ितरत से हूँ मैं सब से जुदागाना समझियेहै इश्क़ मुझे आप न दीवाना समझियेदस्तूर…See More
35 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा

तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा हर बार मुझ से पहले तेरा नाम आएगा. .अच्छा हुआ जो टूट गया दिल तेरे…See More
35 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"बहुत उम्दा शे'र हुए है, आ. नाहक साहिब ,    "इश्क़ से ना हो राब्ता…"
5 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी (~रूपम कुमार 'मीत')
"आदरणीय निलेश साहिब जी,  मेरा  प्रणाम आपको, बहुत शुक्रिया आपका, बहुत दुआएं, सलामत रहे…"
5 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी (~रूपम कुमार 'मीत')
"अब मुकम्मल हो गया शेर बधाई "
16 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी (~रूपम कुमार 'मीत')
"आ. अमीरुद्दीन साहिब जी, बहुत शुक्रिया आपका, एक कोशिश हमने भी की है, आपने मेरे ख़याल को मरने नहीं…"
17 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी (~रूपम कुमार 'मीत')
"जनाब रूपम कुमार जी,  //यक़ीन कैसे करें बे-वफ़ा की बातों पर हम उनके दिल में हैं तो चीर कर दिखाए…"
18 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"आ. "अमीर" साहब,यूँ तो मैं अपनी आख़िरी टिप्पणी कर  चुका हूँ अत: पुन: आना ठीक नहीं लगता…"
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"//मेरी पिछली टिप्पणी में मुझ से एक त्रुटी हुई है जिसकी ओर ध्यान दिलाने के लिए आपका आभार लेकिन इस के…"
19 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"शुक्रिया आ. दण्डपाणी जी आभार "
19 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - तर्क-ए-वफ़ा का जब कभी इल्ज़ाम आएगा
"शुक्रिया आ. रूपम जी,आपके लिए आज का टास्क है कि इस बह्र के अरकान लिखें..इससे आप की भी प्रैक्टिस हो…"
19 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service