For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पास क्या दूर भी नहीं कोई (इमरान खान)

आज किस तरह ज़िन्दगी खोई,

पास क्या दूर भी नहीं कोई.

एक तस्वीर दिल पे है चस्पा,

रूह जिसको लिपट-लिपट रोई.

रात भर बेकली रही मुझ पर,

और दुनिया सुकून से सोई.

फूल आंगन में अब न तुम ढूंढो,

फस्ल काँटों भरी अगर बोई.

वक़्त अपना कुछ इस तरह बीता,

हमनशीं हो गई गज़लगोई.

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 508

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ravi Shukla on August 10, 2015 at 1:34pm

आदरणीय इमरान जी अच्‍छी ग़ज़ल के लिये दाद कुबूल करें


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 9, 2015 at 1:20pm

आदरणीय इमरान भाई , अच्छी ग़ज़ल कही है , सभी अश आर बहुत सुन्दर हुये हैं , हार्दिक बधाइयाँ आपको ।

Comment by Samar kabeer on August 8, 2015 at 11:26pm
जनाब इमरान ख़ान साहिब ,आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही है आपने ,मुबारकबाद क़ुबूल करें,दूसरे शैर के ऊला मिसरे में 'चस्पा' को "चस्पाँ" कर लें ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 6, 2015 at 9:43pm

आदरणीय इमरान जी शानदार ग़ज़ल हुई है शेर दर शेर दाद हाज़िर है-

आज किस तरह ज़िन्दगी खोई,

पास क्या दूर भी नहीं कोई...............बढ़िया मतला हुआ है 

एक तस्वीर दिल पे है चस्पा,

रूह जिसको लिपट-लिपट रोई......... वाह वाह ...शानदार शेर 

रात भर बेकली रही मुझ पर,

और दुनिया सुकून से सोई....... बेहतरीन शेर..... दाद ही दाद 

फूल आंगन में अब न तुम ढूंढो,

फसल काँटों भरी अगर बोई...........वाह वाह 

वक़्त अपना कुछ इस तरह बीता,

हमनशीं हो गई गज़लगोई.............. बहुत सुन्दर 

इस शानदार प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई 

Comment by Harash Mahajan on August 6, 2015 at 7:35pm

आ० इमरान खान  जी

आज किस तरह ज़िन्दगी खोई,

पास क्या दूर भी नहीं कोई.....वाह बेहद उम्दा !!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on August 6, 2015 at 7:24pm

एक तस्वीर दिल पे है चस्पा,

रूह जिसको लिपट-लिपट रोई..................वाह वाह!

बहुत सुन्दर गज़ल बधाई आदरणीय!

Comment by narendrasinh chauhan on August 6, 2015 at 6:17pm

खूब सुन्दर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Saturday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service