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तराशते पत्थर (कविता) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी

चित्र या चलचित्र
से
चर्चित विचित्र
पथभ्रष्ट कट्टर
बस
तराशते पत्थर ।
किस निमित्त
बनती, टूटती
ईंट-पत्थर की इमारत
आस्थाओं की इबारत
किसकी, कैसी
प्रार्थना या इबादत
कुछ
हटकर
साम्प्रदायिकता से
सटकर डटकर
अमन-चैन को देकर
कठोर टक्कर
भावुक जन-गण से
चंदा जुटाकर
नमूने दिखाकर
अपने ही मुल्क के
क़ानून को
बस
ठेंगा दिखाकर
कौन, कैसे
कलाकारों के हाथों
उकेरते पत्थर
चर्चित विचित्र
पथभ्रष्ट कट्टर
बस
तराशते पत्थर।
कुछ दिल से पत्थर
कुछ भावनाओं में बहकर
करते बस
व्यर्थ मतान्तर
विवाद उठाकर
नकारात्मक राजनीति
में मन रंगकर
संविधान से हटकर
चर्चित विचित्र
पथभ्रष्ट कट्टर
बस
तराशते पत्थर ।
देश हित में
स्वार्थ तजकर
काश मिलकर
तराशते व्यक्तित्व
करते स्थापित
बस
मील के पत्थर ।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 8, 2017 at 6:31am
रचना पटल पर समय देने हेतु सभी पाठकगण को तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया।

कृपया ध्यान दे...

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