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राह हमें उत्कर्ष की, नित दिखला नववर्ष......

दोहा छंद आधारित गीत
================
मन सहिष्णु भटके नहीं,

लेकर भाव अमर्ष

राह हमें उत्कर्ष की, नित दिखला नववर्ष.....

 

झाँक रही दीवार से,

खूंटी ओढ़े  गर्द

साल मुबारक हो नया,

कहता मौसम सर्द

जंत्री नूतन साल की, करती ध्यानाकर्ष

 

लौटें लेकर सुदिन सब,

उत्सव औ त्यौहार

मिलना जुलना हो सहज,

सरल भाव व्यवहार

जाति धर्म के नाम पर, हो न कभी संघर्ष

 

गीत छंद कविता गजल,

ललित कलेवर कांत

करें सृजन हम काव्य नव,

हो भाषा संभ्रांत

शोध सोच नव बिंदु सह, नव  मानक दे  हर्ष


बने मेक इन इंडिया,

जन मन का आधार   

अपना  डिजिटल इंडिया,

हो सपना साकार

प्रगति मंत्र यह हो खरा, मानें सभी सहर्ष

 

निकट बिदाई की घड़ी,

दिखा अनमना साल

यादों की गठरी थमा,

चला फुलाकर गाल

दृश्य शुभग छक के पियें, शाश्वत  नयन सतर्ष

 

-    मौलिक व अप्रकाशित  

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Comment by Satyanarayan Singh on January 5, 2016 at 4:10pm

सादर धन्यवाद आदरणीय नीरज जी

Comment by Neeraj Neer on December 28, 2015 at 8:45pm

बहुत उत्कृष्ट लगा मुझे तो .... हर शब्द मानो अर्थपूर्ण और नाप तौल कर रखे गए हों जैसे। बहुत बधाई इस गीत के लिए । 

Comment by Satyanarayan Singh on December 28, 2015 at 4:32pm

आ. सतविंदर जी उत्साहवर्धन एवं बधाई  के लिए आपका हार्दिक आभार

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 28, 2015 at 8:32am
वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्!बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।बहुत बहुत बधाई आपको।
Comment by Satyanarayan Singh on December 27, 2015 at 9:25pm

आदरणीय आशुतोष जी  उत्साहवर्धन एवं बधाई  के लिए आपका हार्दिक आभार

Comment by Satyanarayan Singh on December 27, 2015 at 9:24pm

आदरणीया प्रतिभा जी उत्साहवर्धन एवं बधाई  के लिए आपका हार्दिक आभार

Comment by Satyanarayan Singh on December 27, 2015 at 9:23pm

आदरणीय सुनील सरना जी उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार

Comment by Satyanarayan Singh on December 27, 2015 at 9:23pm

आदरणीय समर कबीर जी उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 26, 2015 at 7:30pm

aadarneey नव बर्ष के आगमन से पहले ही इतनी शानदार रचना पढने को मिल गयी ..इस रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by pratibha pande on December 26, 2015 at 12:51pm

निकट बिदाई की घड़ी,

दिखा अनमना साल

यादों की गठरी थमा,

चला फुलाकर गाल

दृश्य शुभग छक के पियें, शाश्वत  नयन सतर्ष.......नए वर्ष का सुन्दर अभिनंदन किया है आपने आदरणीय  सत्यनारायण जी ,तहे दिल से बधाई स्वीकार करें इस सुन्दर रचना पर 

 

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