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कसीदे काम के पिछले सुना है वो पढ़ेगा कल (नव वर्ष पर ग़ज़ल 'राज )

नई हसरत नई हिम्मत नई परवाज़ देगा कल

मिटाने  तीरगी सबकी  नया सूरज उगेगा कल

 

नये सपने उगाये खेत में देखो सियासत ने

फ़लक तक कीमतें पाकर बशर बेबस हँसेगा कल

नये इस दौर में आकर हुआ नेता कलम मेरा

अधूरा छोड़ कर कल का नया वादा लिखेगा कल 

 

किसी भी रोज दफ्तर में किया कुछ भी नहीं जिसने

कसीदे काम के पिछले  सुना है वो पढ़ेगा कल

 

जो पिछले साल सोचे थे हुए पूरे कहाँ उसके  

भुलाकर वो पुराने अब नये संकल्प लेगा कल

 

सदा मिलती उन्हें मंजिल सही जो रास्ता चुनते

नया विश्वास निश्चय से नया साहस भरेगा कल

 

बुनेंगे हम अगर रिश्ते अदावत की सलाई से  

हमारे आज के नक्शे कदम पर फिर चलेगा कल

 

सबक इतिहास से लेकर सुधारों आज ये अपना

समझ जाओ अगर चाहो जो तुमसे फिर कहेगा कल 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by rajesh kumari on December 31, 2015 at 11:57am

आ० मुकेश श्रीवास्तव  जी .सर्व प्रथम तो आप नव वर्ष की बधाई लीजिये| दूसरे  ग़ज़ल पर अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया हेतु आभार ,बहुत बहुत शुक्रिया कुबूलें |  

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on December 31, 2015 at 11:47am

 khoobsoorat aur asar daar gazal - badhaee Raaz jee


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 30, 2015 at 4:46pm

आ० डॉ० गोपाल जी,आपको ग़ज़ल पसंद आई  मेरा लिखना सार्थक हुआ तहे दिल से आभार आपका |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 30, 2015 at 4:24pm

आदरणीय  दीदी --- आपने आने वाले नव वर्ष की आधारशिला रख दी  और क्या ख़ूबसूरती से रखी हर शेर  अपनी कहानी खुद सूना रहा है . सादर . 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 30, 2015 at 2:07pm

आ० श्याम नारायण जी आपका बहुत- बहुत शुक्रिया. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 30, 2015 at 2:06pm

आ० लक्ष्मण भैया,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरी  मेहनत  सफल हुई दिल से बहुत बहुत आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 30, 2015 at 2:05pm

आ०  आशुतोष जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई दिल से बहुत बहुत शुक्रिया एरा लिखना सार्थक हुआ  |आप जिस शेर की बात कर रहे हैं वो पूर्णतः स्पष्ट है हमलोग हर साल संकल्प लेते हैं कुछ करने का अगला साल आते आते उसे पूरा तो करना दूर उसे भुलाकर नए लेने शुरू कर देते हैं यहाँ कल अर्थात आने वाले नए वर्ष के कल से मुखातिब हूँ | शायद अब स्पष्ट हो जाएगा  सादर .  

Comment by Shyam Narain Verma on December 30, 2015 at 1:06pm
"क्या बात है ..... बहुत खूब ... बधाई आप को "
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 30, 2015 at 11:46am

किसी भी रोज दफ्तर में किया कुछ भी नहीं जिसने

कसीदे काम के पिछले  सुना है वो पढ़ेगा कल

आ० राजेश दी .इस ग़ज़ल ने मन मोह लिया .कोटि कोटि बधाई l

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 30, 2015 at 10:31am

आदरणीया राज जी ..रचना के माध्यम से जहाँ आप आशा की किरण जगाती हैं वही आगाह भी करती हैं 

जो पिछले साल सोचे थे हुए पूरे कहाँ उसके  

भुलाकर वो पुराने अब नये संकल्प लेगा कल..इस शेर में मैं थोडा उलझा हूँ ..कमी तो कुछ समझ नहीं आ रही है लेकिन कुछ कमी भी लग रही है ..इस सिर्फ मेरे मन में उठा बिचार है अन्यथा न लीजियेगा सादर प्रणाम और नव बर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ 

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